राजनीति

हटाओ अभियान

आज गुरु को हटा रहे हो; कल आपके चेले आपको हटाएंगे ! गरीबी हटाओ, इंदिरा हटाओ, कांग्रेस हटाओ, लालू हटाओ, लाला हटाओ, बाला हटाओ, मोदी हटाओ….. यह तो हटाने का पारंपरिक उत्सव है ! जिन्हें जिनके विचार पसंद नहीं आये, उन्हें हटाओ ! शाह (जहाँ) को हटा औरंग (जेब) सत्तासीन हुए, मुलायम को हटा अखिलेश […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म लेख

भारतीय संस्कृति रहस्यवादी है !

‘भारतीय संस्कृति’ रहस्यवादी है, तो स्पष्टवादिता लिए ! सम्पूर्ण दुनिया में ‘भारतीय सभ्यता और संस्कृति’ की अक्षुण्ण रहस्यवादिता को विदेशी विद्वानों और दुश्मनों ने भी माना। क्या मेगास्थनीज़, ह्वेनसांग, मेक्समूलर ! तो कामिल बुल्के, रस्किन बांड आदि तो यहीं के रह गए । अल्लामा इक़बाल ने तो कलमतोड़ प्रशंसा किये। जिसतरह से ताज़महल हमारी आन- […]

सामाजिक

मोर्चे पर महिलाओं के बढ़ते कदम

  भारत में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन और कमांडिंग ऑफिसर के स्तर तक उठने के समान अवसर के लिए रास्ता साफ कर दिया तो उधर पाकिस्तान में पहली महिला जनरल की खबर सुर्ख़ियों में है. दुनिया में आज हर क्षेत्र में महिलायें आगे बढ़ रही है और ऐतिहासिक […]

स्वास्थ्य

आयुर्वेद चिकित्सा को बढाना चाहिए

प्राकृतिक और आयुर्वेद चिकित्सा में सारे गुण और औषधि मौजूद है जरूरत है विश्वास करने की।यह हमारी परंपरागत औषधि है जिससे वोकल और लोकल को बढ़ावा देने के सारे गुण हैं।हमें तुरंत एक्शन की आदत हो गयी है जिसका वाहिष्कार किया जाना चाहिए। आज पूरा विश्व जहाँ एक दवा नहीं खोज पायी वही हमारे योग […]

सामाजिक

रंगभेद

रंगभेद यानी श्वेत अश्वेत (गोरे काले) की लड़ाई न जाने कितने सालों से चली आ रही। इस ज्वलंत मुद्दे को उठा कर उस पर कार्य करने की नेल्सन मंडेला की बेहद ही अहम भूमिका रही है। पर सदियों से चला आ रहा रंगभेद का मुद्दा कभी थमा ही नहीं। जब बैरक ओबामा ने  अमेरिका की […]

इतिहास राजनीति लेख

चीन-चान

चीन ने पिछले दिनों ‘वन बेल्ट,वन रोड’ (OBOR) पहल पर चर्चा के लिए 60 से अधिक देशों को आमंत्रित किया था, जिनमें भारत शामिल नहीं हुआ । चूंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए OBOR एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, इसके तहत एशियाई, अफ्रीकी और यूरोपीय देशों के साथ चीन को सड़क और जलमार्गों को साथ […]

भाषा-साहित्य लेख

पॉकेट बुक्स, जासूसी उपन्यास और वेदप्रकाश शर्मा

हिंदी जासूसी उपन्यासकारों में प्रमुख स्तम्भ वेदप्रकाश शर्मा नहीं रहे। हालाँकि वे पॉकेट बुक्स व लुगदी साहित्य के पुरोधा थे, तथापि उनके उपन्यास ‘वर्दी वाला गुंडा’ की लगभग 10 करोड़ प्रतियाँ बिकी थी, जो किसी भी भारतीय नामवरी-साहित्यकारों की कृतियों के लिए संभव नहीं रहा है। पाठकों में रोचकता लाने के मामले में उनके उपन्यास […]

इतिहास लेख

जीवित किंवदंती : नेताजी सुभाष

नअंग्रेजी राज से प्रताड़ित और अपने ही जमींदारों से शोषित-वंचित भारतीयों के मसीहा थे – सुभाष चंद्र बोस । आई.सी.एस. में चौथा स्थान और देशसेवा के लिए कलक्टरी छोड़ी तथा जनमानस में छा गए । दो बार कांग्रेस के अध्यक्ष होकर भी वे पार्टी-पॉलिटिक्स से ऊपर की चीज हो गए थे, क्योंकि वे मानवता से […]

लेख विविध

इंटरनेट युग में भी पुस्तकों की माँग पूर्व की भाँति

इंटरनेट और इलेक्ट्रॉनिक युग में प्रिंट व मुद्रित पुस्तकों की महत्ता अब भी बरकरार है । अभी राजधानी पटना में पुस्तक-मेला चल रही है । हरतरह के मेले की भाँति पुस्तक-मेले की अवधारणा जिस किसी विद्वान ने की होगी, वे सचमुच में बधाई के पात्र हजिसतरह से विविध भाँति के मोबाइल फोन होने से डाकघरों […]

लेख सामाजिक

बुढ़ापे तक होती है प्यार-तकरार

नहाय-खाय के साथ दिनांक 7 फ़रवरी से प्यार का पर्व ‘वैलेंटाइन-डे’ शुरू हो गई जो की वास्तविक रूप में 14 फ़रवरी को पूरे नशे में पूरी दुनिया में मनाई गई लेकिन ‘प्यार का पर्व’ यही खत्म नहीं हुआ– ‘मार्केटिंग’ को बढ़ावा देने के लिए ‘उच्च कोटि’ के कारोबारी ने प्यार के इस पर्व में ग्रीटिंग-कार्ड्स […]