राजनीति

बबूल के पेड़ में आम नही लगते – मौजूदा नीति तो यही कहते

बिहार एक ऐतिहासिक राज्य जहाँ भगवान बुद्ध, दानवीर कर्ण, चाणक्य, सम्राट अशोक और गुरूगोविंद सिंह जैसे महापुरुषों ने सींचा सँवारा था।वही बिहार आज बदहाली के दल दल में नित धँसता जा रहा इसका जिम्मेदार कौन? आकांक्षा थी कि सभी पढे,सभी का सम्मान हो, सभी एक समान विचारवान हो, सभी को रोटी, कपडा और मकान हो, […]

राजनीति

बांधों की संपोषण और बाढ़ राहत के कार्य सेना के हवाले किए जाएँ

सरकार के स्तर पर नीतियों में जब भी कमी दिखती है , आलोचना का दौर शूरू हो जाता है होना भी चाहिए।लेकिन राजनीतिक नीतियों की आज तक  आलोचना क्यों नहीं होती और न सुधार होता है ।आखिर यह कैसी व्यवस्था है?   जबकि राजनीतिक नीतियो में कई दोष मौजूद हैं । सरकार के ये दावे […]

राजनीति

कोरोनाकाल में भूमि पूजन !

कोरोनाकाल एक संक्रमणकाल है, एतदर्थ इस संक्रमण के दौर में मन के अंदर आस्था और श्रद्धा निहित होनी चाहिए, न कि बाह्यपूजा ! यज्ञ प्रयोजन और भूमि पूजन अभी के समय में नहीं हो तो बेहतर है ! भूमिपूजन को लेकर माननीय सर की सहमति आशावादी हो सकती है, किन्तु यथार्थवादी सोच लिए नहीं। कोरोना […]

राजनीति

पेरियार की कहानी दलित की जुबानी !

चेन्नई की झुग्गी-झोपड़ी में एक दलित परिवार में जन्मे और वहीं पचीस वर्ष बिताने वाले ऐम वेंकटेशन एक आस्थावान हिंदू हैं। उन्होंने चेन्नई के विवेकानन्द महाविद्यालय से दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है। जब वेंकटेशन ने महाविद्यालय में प्रवेश लिया तो उनके कथनानुसार उन्हें प्रतिदिन पेरियारवादियों के एक ही कथन का लगातार सामना […]

राजनीति

क्या ये हैं भारत पाकिस्तान विवाद का हल?

बीते कुछ दिनों से भारत और चीन के बीच का सीमा विवाद काफी चर्चा में है, मामला काफी गंभीर है अतः चर्चा होना लाजमी हैं पर हम इस बात को बिल्कुल नज़रअंदाज़ नही कर सकते कि भारत पाकिस्तान विवाद भी उतना ही चिंता का विषय है जितना भारत चीन विवाद। जब भी भारत पाक विवाद […]

राजनीति लेख

यूएनओ के उप महासचिव के बाद शशि थरूर का कॅरियर

साहित्यकार, राजनयिक और राजनीतिज्ञ डॉ. शशि थरूर ‘ईसाई’ है, जो न हिन्दू है, न मुस्लिम ! इसलिए वे हिन्दू पाकिस्तान की परिकल्पना कर गए, क्योंकि वह जान रहे हैं कि अपना देश भी मुस्लिम हिंदुस्तान बनते जा रहा है । इस उप महाद्वीप में 70 करोड़ के करीब इस्लाम धर्मावलम्बी जो रहते हैं ! क्यों […]

राजनीति

इंडिया नहीं, भारत ही कहा जाए

इंडिया को भारत ही कहा जाए। एक राष्ट्रवादी सरकार के बाद अब देश का प्रबुद्ध नागरिक भी सचेत हो गया है और भारत के धर्म के साथ साथ सांस्कृतिक एवं धार्मिक प्रभुसत्ता को स्थापित करने में योगदान देने चल पड़ा है। हमारे देश का नाम इंडिया की जगह भारत ही कहने पर बहस छिड़ी है। […]

राजनीति लेख

शिक्षक और सेवाशर्त्त !

बिहार के नियोजित शिक्षकों के आत्मसम्मान और हक-हकूक पर माननीय उच्चतम न्यायालय में 12.07.2018 की तारीख में हुए विशद चर्चा पर पटाक्षेप की संभावना अथवा पक्ष में न्यायादेश की बड़ी उम्मीद थी, किन्तु सरकारी दु:प्रयासों से ऐसा हो नहीं सका ! ध्यातव्य है, बिहार के सभी तरह के चुनावों में महत्वपूर्ण किरदार में ये नियोजित […]

अन्य लेख राजनीति

पुलिस एनकाउंटर गैर-कानूनी विकल्प है !

पुलिस एनकाउंटर से सभी राज दफन हो जाते हैं । यह सच है, सिर्फ जुलाई माह में एक सीओ सहित 8 पुलिसकर्मियों की मुठभेड़ में हत्या करने के दुर्दांत दोषी विकास दुबे मतलब विनाश दुबे था । अन्य वर्षों में कितनी हत्याएँ उनके मत्थे रहे होंगे, एनकाउंटर से उनकी मौत के राज दफ़न हो गए […]

राजनीति

मजबूत नेतृत्व क्षमता का एक प्रमुख भाग है- कठोर निर्णय 

समावेशी नेतृत्व का अर्थ बड़ा ही व्यापक और संधर्ष करने वाला होता है,  जो संयम, धैर्य और सहनशीलता के साथ सबको समान भावना के साथ समावेश कर आगे बढ़ने को प्रेरित करे।जो खुद की नहीं  अपितु अपने संगठन अपने लोगो के आगे बढाने की सोच रखे वही नेतृत्व कहलाता है। सभी को समान अवसर मिले, […]