सामाजिक

भूगोल में मनुष्य सृष्टि का आदि स्थान एवं अन्य कुछ प्रश्न

संसार में मनुष्यों की जनसंख्या लगभग 7 अरब से कुछ अधिक होने का अनुमान है। संसार में देशों की कुल संख्या 195 से अधिक हैं। इन सभी देशों में सबसे पुराना देश भारतवर्ष है जिसका प्राचीन नाम आर्यावर्त है। आर्यावर्त से पूर्व इस देश का अन्य कोई नाम नहीं था। इस आर्यावर्त देश में ही […]

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आतंकवादी सिखों को गुरु ग्रंथसाहब की सीख

  हमारे कुछ सिख भाई पाकिस्तानी मुसलमानों के बहकावें में आकर अपने आपको हिन्दू धर्म से अलग दिखाने की होड़ में “हम हिन्दू नहीं हैं” , “सिख गौ को माता नहीं समझते”, “सिख मुसलमानों के अधिक निकट हैं क्यूंकि दोनों एक ईश्वर को मानते है” जैसी बयानबाजी कर हिन्दुओं और सिखों के मध्य दरार डालने […]

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वर्तमान समय में वानप्रस्थ आश्रम की प्रासंगिकता

मनुष्य का जन्म माता-पिता से होता है जो कि ईश्वर की व्यवस्था का पालन करते हुए किसी जीवात्मा को जन्म देने में साधनमात्र हैं। मनुष्य जन्म कर्म-फल सिद्धान्त के अनुसार पूर्व जन्म में किये गये शुभ व अशुभ कर्मों का फल भोगने व नये शुभाशुभ करने के लिए होता है। संसार का नियम है कि […]

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वेदों में नारी

नारी जाति के विषय में वेदों को लेकर अनेक भ्रांतियां हैं। भारतीय समाज में वेदों पर यह दोषारोपण किया जाता हैं की वेदों के कारण नारी जाति को सती प्रथा, बाल विवाह, देवदासी प्रथा, अशिक्षा, समाज में नीचा स्थान, विधवा का अभिशाप, नवजात कन्या की हत्या आदि अत्याचार हुए हैं। किसी ने यह प्रचलित कर […]

सामाजिक

उन्नति का मार्ग

समस्त जीवधारियों में मनुष्य को श्रेष्ठ माना गया है। अथर्ववेद में कहा गया है कि हे पुरुष, यह जीवन उन्नति करने के लिए है, अवनति करने के लिए नहीं। परमेश्वर ने मनुष्य को दक्षता और कार्यकुशलता से परिपूर्ण किया है। ईश्वर यहां हमें पुरुष शब्द से संबोधित कर रहे हैं जिसका अर्थ है जो कार्य […]

सामाजिक

महिला दिवस की आड़ में पश्चिमी पाखंड

आज महिला दिवस है। अनेक अंग्रेजी अख़बारों में महिला दिवस के अवसर पर लेख प्रकाशित हो रहे हैं जिनका विषय महिला अधिकारों की बात करना है। मगर महिला अधिकारों की आड़ में महिलाओं को क्या सन्देश दिया जा रहा हैं यह जानना आवश्यक हैं। 16 दिसंबर के निर्भया कांड पर एक विदेशी पत्रकार द्वारा चलचित्र […]

सामाजिक

अब्राहम (इब्राहिम), ब्राह्मण और संस्कृत , अरबी

संस्कृत दो प्रकार की हैं एक वैदिक और दूसरी लौकिक , वेदों की भाषा वैदिक संस्कृत मानी गई है । जब कौत्स ने वेदों को निरर्थक कहा तो यास्काचार्य ने निरुक्त लिख कर कहा की वेदों को जानने के लिए वैदिक संस्कृत आनी चाहिए सिर्फ लौकिक संस्कृत से वेदों को नहीं जाना जा सकता । […]

सामाजिक

प्रेम. उत्साह और नव अन्न का पर्व होली

फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन मनाये जाने वाले पर्व को होली के नाम से जाना जाता है। होली के अगले दिन चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को भी होली मनाते हुए अपने इष्ट-मित्रों व परिवारजनों के साथ एक दूसरे से मिल कर उन्हें कई प्रकार के रंग लगाने व परस्पर गीला रंग डालने, होली […]

ब्लॉग/परिचर्चा सामाजिक

मदर टेरेसा – सेवा बनाम धर्मान्तरण 

संघ प्रमुख मोहन भागवत का मदर टेरेसा पर दिया गया बयान की मदर टेरेसा द्वारा सेवा की आड़ में धर्मान्तरण करना सेवा के मूल उद्देश्य से भटकना है पर ईसाई समाज द्वारा प्रतिक्रिया तो स्वाभाविक रूप से होनी ही थी मगर तथाकथित सेक्युलर सोच वाले लोग भी संघ प्रमुख के बयान पर माफ़ी मांगने की […]

ब्लॉग/परिचर्चा सामाजिक

बिहार में राजनीति तले दबी शिक्षा

हमारा बिहार राज्य पहले से ही राजनेताओं के राजनीति एवं भ्रष्टाचार के वजह से गरीब तथा पिछड़ा हुआ है। यहाँ के छोटे से लेकर बड़े लोग या छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अफसर तक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जब हमारे माननीय मुख्यमंत्री श्री लालूप्रसाद यादव जी के समय में ही शिक्षा की नीति ऐसी बनी […]