नवीनतम लेख/रचना

  • गुरुडम और अन्धविश्वास

    गुरुडम और अन्धविश्वास

    रामपाल, आशाराम बापू, डेरा सच्चा सौदा, साईं बाबा, आशुतोष महाराज वगैरह वगैरह इस प्रकार से कभी न ख़त्म होने वाली इस सूची में अनेक बाबा, अनेक स्वघोषित भगवान, अनेक कल्कि अवतार इस समय भारत देश में...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    अरुण की लालिमा भोर का स्वागत चाँद छिप जाता सूरज का स्वागत फूल खिल जाते कली खिल जाती किरणें रश्मि रथ साथ है आगत

  • वो हिन्दू थे

    वो हिन्दू थे

    उन्होंने विपत्ति को आभूषण की तरह धारण किया उनके ही घरों में आये लोगों ने उन्हें काफ़िर कहा क्योंकि वो हिन्दू थे। उन्होंने यूनान से आये घोड़ो का अभिमान चूर – चूर कर दिया सभ्यता ने...


  • हाइबन

    हाइबन

    पहली हमारी कोशिश हाइबन लिखने की इधर आइये तो पढ़ अवश्य बताइए कैसी है यह अदना कोशिश ….आप सभी के इंतजार में मेरी यह रचना …:) ओह कितनी खुबसुरत तस्वीरें है| काश मैं भी घूम पाती...


  • इक ‘आसरा’ सब का,

    इक ‘आसरा’ सब का,

    उठाना खुद ही पड़ता है, थका टूटा बदन अपना जब तक सांस चलती है, कोई कान्धा नहीं देता, न रिश्ते में न यारी में कोई उम्मीद बाकी है यहाँ मर मर के जीते हैं, कोई होंसला...


  • मैं बाक़ायदा….

    मैं बाक़ायदा….

    मैं बाक़ायदा सृजित आकार नहीं हूँ नवरस हूँ सिर्फ़ छन्द अलंकार नहीं हूँ केवल परहन ए जिस्म न समझना मुझे पहले निराकार हूँ ज़्यादा साकार नहीं हूँ मन का ख्याल हूँ ,ख्वाब हूँ ,तसव्वूर हूँ दिमाग़...

  • लघुकथा : हूर बनने का खौफ

    लघुकथा : हूर बनने का खौफ

    ‘आज तुम्हे क्या हो गया है तहज़ीब।’ अपने सीने से चिपटी एक गोरी, छरहरी, कमसिन लड़की को अपने सीने से अलग करके अपने से पर लगभग धक्का देते हुए वो बोला। ज़मीन पर पड़े कुछ लम्हे...

कविता