उपन्यास अंश

यशोदानंदन-३२

राधा का गोरा मुखमंडल लज्जासे आरक्त हो उठा। मन में असमंजस के भाव उठ रहे थे – एक अपरिचित छोरे को अपना परिचय दें, या न दें। परन्तु वह भी समझ नहीं पा रही थी, उस अपरिचित छोरे का मुखमंडल और मधुर स्वर चिर परिचित जैसा क्यों लग रहा था? एक बार पुनः वह मुड़ी। […]

लघुकथा

लघु कथा : ख्बाहिश

हर लड़की की तरह रजनी की भी ख्बाहिश थी कि उसे भी दुल्हन के रूप में लेने के लिए कोई राजकुमार चांदी के रथ पर चढ़ कर आये और उसे अपने महलों में ले जाए ! जब वह अपनी सहेली निशा से अपनी इस ख्बाहिश के बारे कहती तो दोनों सखियाँ अपने -अपने ससुराल और अपने होने वाले शौहर […]

कहानी

अधूरे पंख

कितना भोलापन था उस दिन तुम्हारे चेहरे पर, मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्ति के आगे जब तुम हाथ जोड़कर खड़ी थी। मैं कभी तुम्हें और कभी मूर्ति को निहार रहा था। मंदिर से बाहर आकर गार्डन में टहलते हुए जब मैंने तुमसे पूछा, मुझसे शादी करोगी उस समय तुम्हारा चेहरा लाज से लाल हो गया […]

बाल कविता

नानाजी का पतंग शौक

चुन्नु-मुन्नू के नानाजी को, पतंग उड़ाने का शौक लगा, रंगीले पतंगों को देखा तो उनको ये बे-रोक लगा..! नानाजी ने झुर्रीले हाथों में पतंग उठाई, एक हवा के झोंके ने हाथों से छिटकाई, नानाजी धीमे-धीमे पतंग के पीछे दौड़े, पतंग गिरी छत के नीचे फिर भी ना पीछा छोड़े, साँसे नानाजी की फूलने को थी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

ईश्वरीय ज्ञान वेद के पुनरूद्धारक, रक्षक व प्रचारक महर्षि दयानन्द

भारत का इतिहास संसार में सबसे प्राचीन है। भारत के पास महाभारत नामक इतिहास ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में वर्णित महाभारत युद्ध की काल गणना करने पर यह पांच सहस्र वर्षों से कुछ अधिक पूर्व हुआ सिद्ध होता है। महाभारत से पुराना ग्रन्थ वाल्मिीकि रामायण व इसमें वर्णित इतिहास है जिसकी गणना लाखों व करोड़ों […]

सामाजिक

पांच हजार साल से सोने वालो जागो

बिजनौर जनपद में साधारण से दिखने वाले निहाल सिंह सरकारी चौकीदार थे। आपकी अनेक स्थानों पर बदली होती रहती थी। एक बार एक बड़े कस्बें में आपका तबादला हुआ। रात को पहरा देते हुए आप कहते थे “पांच हजार साल से सोने वालो जागो”। आपकी आवाज सुनकर लोग आश्चर्य में पड़ गए क्यूंकि उन्हें जागते […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चलो उनसे सलाम हो जाए । इस तरह इंतकाम हो जाए ।। चाँद से डर था बेवफाई का । उसका किस्सा तमाम हो जाये ।। बहुत लम्बी है दास्तां तेरी । कुछ अधूरा कलाम हो जाए ।। बे वजह जिद है रूठ जाने की । अब तेरा इंतजाम हो जाए । टूट के गिरना ही […]

कविता पद्य साहित्य

सिर्फ तुम्हीं हो!!

तुम्हीं हो सिर्फ तुम्हीं हो। न जाने कब तक रहोगे। हर यादों में हर वादों में। हर पलो में हर लम्हों में। तुम्हीं हो सिर्फ तुम्हीं हो। अंधेरे में उजालों में। हर ख्वाबों में हर सपनों में। जब देखो तब तुम्हीं हो। तुम्हीं हो सिर्फ़ तुम्हीं हो। छोड़ न जाना मुझे कभी। नहीं तो तन्हां […]

कविता

नदियाँ

पिता पर्वत की गोद से, सब नदियाँ निकलती हैं। चलने लगती मोद में, कल-कल ध्वनि करती हैं। चीड़ देवदार जंगलों से, धरातल पर गुजरती हैं। जंगल मे रहने वालों की, प्यास बुझाया करती हैं। जीवों के उदित नया जीवन बन कर आ जाती हैं। अपने पिता को भूलकर, सबका कल्याण करती हैं। साथ निभाकर सफर […]

आत्मकथा

आत्मकथा – दो नम्बर का आदमी (कड़ी 29)

वाराणसी में जो नया फ्लैट मैंने किराये पर लिया था, वह श्रीमतीजी को बहुत पसन्द आया। अगले कुछ दिन घर को जमाने में लगे। उस समय मेरे पास कोई विशेष फर्नीचर आदि नहीं था। केवल दो फोल्डिंग पलंग, एक तख्त और एक साधारण मेज-कुर्सी थी। कुछ दिनों के बाद ही मुझे बैंक से आवश्यक फर्नीचर […]