गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल- ***खुशी मिलेगी***

जब भी कोई नदी मिलेगी.
सागर को जिंदगी मिलेगी.
सूरज में रोशनी रही तो,
चंदा को चाँदनी मिलेगी.
नेकी करके कभी न सोचो,
नेकी या फिर बदी मिलेगी.
मीठे सपने नमी आँख में-
रहने दो,चाशनी मिलेगी.
मन खुश हो तो खुशी वही है,
तुमसे मिलकर खुशी मिलेगी.
डॉ.कमलेश द्विवेदी
कानपुर
मो.09415474674

2 thoughts on “ग़ज़ल- ***खुशी मिलेगी***

  • विजय कुमार सिंघल

    वाह वाह ! बहुत सुन्दर ग़ज़ल ! सरल शब्दों में गहरे भाव !

  • इंतज़ार, सिडनी

    वाह खूबसूरत ….बधाई

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