पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा – जादुई गुब्बारे ( बालकहानी संग्रह )

आलोच्य पुस्तक ‘जादुई गुब्बारे’ की लेखिका डॉ मंजरी शुक्ला का हिन्दी मे प्रथम बालकहानी संग्रह है | इससे पूर्व अँग्रेजी मे भी उनका एक संग्रह ‘स्वीटीज़ रेनीडे’ आ चुका है | हिन्दी और अँग्रेजी दोनों ही भाषाओं पर समान अधिकार रखने वाली मंजरी जी की कहानियों पर मेरी एकमुश्त राय बनती है कि वे बालकहानियों की जादूगर हैं | बालमन को समझना , फिर कहानियाँ लिखते / पढ़ते हुए एक बच्चे की समझ विकसित करना या यूं कहें कि खुद बच्चा बनकर अपने बचपन मे लौट जाने की अनुभूति पैदा करना ही उनकी जादुई कलम का कमाल है और अपने इस प्रयास मे वे पूरी तरह खरी उतरती हैं |

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जादुई गुब्बारे मे कुल 30 कहानियाँ संग्रहीत है | अलग – अलग रंग व अलग मूड की | बिलकुल गुलदस्ते की तरह | राजा रानी है , परियाँ भी हैं , परिवार भी है समाज भी , जादू भी है तो पर्यावरण भी | ऐसा लगता है जैसे हर बच्चे की रुचि और जरूरत का ध्यान रखकर संग्रह तैयार किया गया है | कहानियाँ पढ़ते हुए उनके कथ्य और शिल्प मे डूब जाना ही इनकी विशेषता है | एकदम भावविभोर कर जाती हैं | सबसे बड़ी बात है कि ये कहानियाँ कही से भी बोझिल नहीं लगती , बस मन करता है कि पढ़कर ही उठो | कोई जबर्दस्ती का उपदेश भी बच्चों पर थोपने का प्रयास नही किया गया है | कहानियाँ अपने आप मनोरंजन और प्रेरणा देती चलती है |

बुद्धा प्रकाशन लखनऊ द्वारा प्रकाशित 90 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य रू.50/- उचित और पाठकों की पहुँच मे है | छपाई सुंदर और साफ़सुथरी है | बीच – बीच मे कंप्यूटराइज्ड चित्र भी है | आवरण पृष्ठ पर भी कम्प्यूटर से ही सीधे चित्र उठाकर डाल दिया गया है | चित्रों पर किसी चित्रकार की सहायता से कुछ और काम करके पूरी पुस्तक को और अधिक आकर्षक बनाया जा सकता था , जो शायद प्रकाशन संबंधी किन्हीं सीमाओं के कारण नहीं किया जा सका | फिर भी कुल मिलाकर यह संग्रह बालसाहित्य को समृद्ध करता है | एक अच्छी पुस्तक के लिए लेखिका सहित प्रकाशन से जुड़ी समस्त टीम बधाई की पात्र है |

अरविन्द कुमार साहू

सह-संपादक, जय विजय

2 thoughts on “पुस्तक समीक्षा – जादुई गुब्बारे ( बालकहानी संग्रह )

  • हम जरुर पड़ेंगे यह कहानिआन.

  • विजय कुमार सिंघल

    ऐसे कहानी संग्रह और अधिक छपने चाहिए. इन कहानियों को ‘जय विजय’ में प्रसारित करने का प्रयास किया जा रहा है.

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