कविता

उदास मन..

मन क्यो उदास हैं
मुझे पता नही
सब मौजुद यहॉ
फिर निराशा क्यो
शायद वो बात नही
रही आज उनमे
जो अपना मानते थे हमें
मै मानती परिवर्तन होता है
पर इतना जल्दी नही
गैर तो गैर होते ही है
पर जिसे अपना मानो
वो भी धोखा दे जाते है
स्वार्थ के लिए ही शायद
आज होते है अपने
यही समझ आज
आ गई हमें |
निवेदिता चतुर्वेदी

निवेदिता चतुर्वेदी

बी.एसी. शौक ---- लेखन पता --चेनारी ,सासाराम ,रोहतास ,बिहार , ८२११०४