लघुकथा

मंगली

पंडितजी ने अर्चना की कुंडली को ध्यान से देखा । कुछ देर उँगलियों पर हिसाब लगाया और फिर हाथ में पकडे पोथी के पन्ने पलटते हुए गंभीर स्वर में रहस्योद्घाटन किया ” लालाजी ! बिटिया की कुंडली में मंगल सातवें घर में है अर्थात मंगल भारी है । राजेश से शादी होते ही उसकी जान को खतरा हो सकता है । ”
पंडित जी की बात सुनकर लालाजी घबरा गए ” पंडितजी ! मैं आपके पैर पकड़ता हूँ । कृपया यह बात किसी को नहीं बताइयेगा । बड़ी मुश्किल से यह लडके वाले तैयार हुए हैं शादी के लिए । इसके निवारण का कुछ उपाय बता दीजिये । ”
” उपाय है जजमान ! बस कन्या की शादी पहले एक कुत्ते से करानी होगी । उसके बाद आप राजेश से उसकी शादी करा सकते हैं । कोई दोष नहीं रहेगा और राजेश को कोई खतरा भी नहीं रहेगा । ” पंडितजी ने समझाया ।
अर्चना दुर से ही सब बातें सुन रही थी बोली ” तो पंडितजी ! मुझसे शादी होते ही वह कुत्ता मर जायेगा ? ”
पंडितजी अपनी पोथी समेटते हुए बाहर नीकल गए ।

*राजकुमार कांदु

मुंबई के नजदीक मेरी रिहाइश । लेखन मेरे अंतर्मन की फरमाइश ।