कवितापद्य साहित्य

आह्वान अर्जुन का

नाद पंचजन्य की रणभेरी आज फिर आई है,

कुरुक्षेत्र के रण से युद्ध पताका लहराई है..

सम्मुख फिर वही आज खड़े दोनों भाई हैं,

उठाउठा अर्जुन गांडीव अपना,करने आलिंगन रणदेवी आई है..

 

मत सोच कि सम्मुख तेरे सगे संबधी या भाई हैं,

ये कुरुक्षेत्र है यहाँ न तेरा कोई अपना न भाई है..

मना उत्सव वसंत रक्त शत्रु के रक्त से,

धर्मयुद्ध के इस उत्सव में सजा थाल मृत्यु देवी आई है..

उठा अर्जुन गांडीव अपना, करने आलिंगन रणदेवी आई है..

 

हे सहस्त्र गज सम बलशाली भीम सुनो,

करी प्रतिज्ञा तुमने वो घड़ी स्मरण करो..

चीर छाती अधर्मी की बन काली तुम रक्तपान करो,

उखाड़ भुजा अधर्मी की ‘हे वीर पूरी अपनी प्रतिज्ञा करो’..

 

इस महासमर की बलिवेदी पर शीश काट – काट लाएँगे,

रक्षा में माँ भारती हिमगिरी से सिन्धु तक रक्त अपना बहाएँगे..

 

कह देना आकाश से,

इस सावन बादलों से लहू शत्रु का बहाएँगे..

जो युद्ध हुआ अबके तो याद रखना,

विश्व पटल के नक़्शे से नाम तेरा मिटाएँगे..

 उठा अर्जुन गांडीव अपनाकरने आलिंगन रणदेवी आई है..

 उठा अर्जुन गांडीव अपनाकरने आलिंगन रणदेवी आई है..

 

रवि – किशोर

३ जुलाई, २०१७

शाम ५.३० 

रवि शुक्ला

रवि रमाशंकर शुक्ल ‘प्रहृष्ट’ शिक्षा: बी.ए वसंतराव नाईक शासकीय कला व समाज विज्ञानं संस्था, नागपुर एम.ए. (हिंदी) स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्व विद्यालय, नागपुर बी.एड. जगत प्रकाश अध्यापक(बी.एड.) महाविद्यालय, नागपुर सम्प्रति: हिंदी अध्यापन कार्य दिल्ली पब्लिक स्कूल, नासिक(महाराष्ट्र) पूर्व हिंदी अध्यापक - सारस्वत पब्लिक स्कूल & कनिष्ठ महाविद्यालय, सावनेर, नागपुर पूर्व अंशदायी व्याख्याता – राजकुमार केवलरमानी कन्या महाविद्यालय, नागपुर सम्मान: डॉ.बी.आर.अम्बेडकर राष्ट्रीय सम्मान पदक(२०१३), नई दिल्ली. ज्योतिबा फुले शिक्षक सम्मान(२०१५), नई दिल्ली. पुरस्कार: उत्कृष्ट राष्ट्रीय बाल नाट्य लेखन और दिग्दर्शन, पुरस्कार,राउरकेला, उड़ीसा. राष्ट्रीय, राज्य, जिल्हा व शहर स्तर पर वाद-विवाद, परिसंवाद व वक्तृत्व स्पर्धा में ५०० से अधिक पुरस्कार. पत्राचार: रवि शुक्ल c/o श्री नरेन्द्र पांडेय पता रखना है अन्दर का ही भ्रमणध्वनि: 8446036580