कविता

जाने कौन ?

कितने पाखण्डी
बन धर्मगुरु
करें ढोंग, अधर्म,
पाखण्ड और मनमानी
फैलाए तिलिस्म,
असत्य की जमीं पर !
कहें…
खुद ही को,
रब के बंदे !
नित रोज रचें,
फरेब के फंदे !
और…
इस माया जाल में,
हो आसक्त,
भटकें भक्त या
फिर खुद अधर्मी बाबा
जाने कौन ? ?

अंजु गुप्ता

*अंजु गुप्ता

Am Self Employed Soft Skill Trainer with more than 24 years of rich experience in Education field. Hindi is my passion & English is my profession. Qualification: B.Com, PGDMM, MBA, MA (English), B.Ed