कविता

प्रकृति का नज़ारा

कितना सुन्दर प्रकृति का नज़ारा
प्रियतम का संग
लगता है कितना प्यारा,
जैसे लौट आया है
वो हसीं ज़िंदगी का दौर दोबारा ,
उसकी याद दिल में संजो कर,
कभी जब मैं-
क्षितिज की ओर देखता हूँ,
लगता है कितना प्यारा ,
धरती आकाश का मधुर मिलन,
पलकें निहारती हैं जब –
ऐसा दिलकश नज़ारा,
ना जाने कितना सुख देता है ,
यह प्रेम आलिंगन,
संग पाकर प्रियतम का
मन पाता है कितना सुख संतोष ,
तोहफा मिलता है खुशबू भरे प्यार का,
मन हो जाता है मदहोश ,
शबनम सी शीतलता देता है,
भर देता जीवन में,
नया रंग नया जोश,
मिलते हैं जीवन में जब ऐसे,
प्यार के अनमोल पल
श्रावणकी शीतल फुहार सा,
खिल उठता है मन कोमल,
—–जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया

जय प्रकाश भाटिया जन्म दिन --१४/२/१९४९, टेक्सटाइल इंजीनियर , प्राइवेट कम्पनी में जनरल मेनेजर मो. 9855022670, 9855047845