कविता

मेरे कृष्णा

एहसास हैं तुझसे,

लफ़्ज़ों के जाल हैं तेरे
रूह मेरी महकी है नाम से तेरे

हमदम कहूँ या कह दूँ हमसाया तुझे

या कोई मेरा ही अधूरा हिस्सा है तू

भूल के तुझे मै, सिर्फ ज़िस्म रह जाती हूँ

रूह तो तुझे खोजने में ही कहीं खो जाती है

ज़िन्दगी की मसरूफ़ियत कहीं भुला न दे नाम तेरा

इस लिए इन साँसों की डोर से बाँध लिया है तुझे

साँसें है जब तक ज़िस्म में, निभा लूँ मै

टूट जाये जब साँसों की डोर,

तब तू भूल ना जाना मुझे…

सुमन “रूहानी”

सुमन राकेश शाह 'रूहानी'

मेरा जन्मस्थान जिला पाली राजस्थान है। मेरी उम्र 45 वर्ष है। शादी के पश्चात पिछले 25 वर्षों से मैं सूरत गुजरात मे रह रही हुँ । मैंने अजमेर यूनिवर्सिटी से 1993 में m. com किया था ..2012 से यानि पिछले 6 वर्षों कविताओं और रंगों द्वारा अपने मन के विचारों को दूसरों तक पहुचने का प्रयास कर रही हुँ। पता- A29, घनश्याम बंगला, इन्द्रलोक काम्प्लेक्स, पिपलोद, सूरत 395007 मो- 9227935630