कविता

कविता – तुम अकेले हो

तुम अकेले हो जहां मे,
मानकर चलना ।
अपनों की दावेदारी का,
वो दौर कोई और था.।।

भागती दुनिया नही थी,
ना वक्त की परवाह थी।।
जिन्दगी में सूकून था,
बस हमारा दौर था।।

दौर बदला,रफ्तार बदली,
नर भी बदला नार बदली।
सामने ही सब टूट बिखरा,
जो आम मे सब बौर था।।

रो रहे सब छुप छुपा कर,
बात हो रही बस घूमाकर।
बिखर रहे सब टूटकर ही,
खत्म हो रहा,जो शौर्य था।।

हृदय जौनपुरी

हृदय नारायण सिंह

मैं जौनपुर जिले से गाँव सरसौड़ा का रहवासी हूँ,मेरी शिक्षा बी ,ए, तिलकधारी का का लेख जौनपुर से हुई है,विगत् 32 बरसों से मैं मध्यप्रदेश के धार जिले में एक कंपनी में कार्यरत हूँ,वर्तमान में मैं कंपनी में डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत हूँ,हमारी कंपनी मध्य प्रदेश की नं-1 कम्पनी है,जो कि मोयरा सीरिया के नाम से प्रसिद्ध है। कविता लेखन मेरा बस शौक है,जो कि मुझे बचपन से ही है, जब मैं क्लास 3-4 मे था तभी से