सामाजिक

कमाल के किस्से-22

ये कमाल क्या है? कमाल क्यों होता है? कमाल कब होता है? कुछ पता नहीं, पर हो जाता है. चलिए आज हम फिर कमाल की ही बात कर लेते हैं.

दिव्यांगों का जजबा- गतांक से आगे-
6.​सुभरीत कौर घुम्मन
सुभरीत कौर एक पैर की डांसर के रूप में लोकप्रिय हैं. एक दुर्घटना में उनको अपना एक पैर गंवाना पड़ा. पंजाब के संगरूर जिले की रहने वाली सुभरीत ने दुर्घटना के बाद हौसला नहीं हारा. एक डांस रिऐलिटी शो में चुने जाने के बाद वह चर्चा में आईं.
7.नवीन गुलिया
दिल्ली के रहने वाले नवीन गुलिया सेना में कमांडर के तौर पर शामिल होना चाहते थे, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था. एक स्पोर्ट्स दुर्घटना में गुलिया लकवाग्रस्त हो गए और उनकी बाईं स्पाइन बुरी तरह घायल हो गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कुछ ऐसा किया कि लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स में उनका नाम दर्ज हो गया. वह पहले व्यक्ति बन गए जिन्होंने दिल्ली से मार्सेमिक ला का सफर किया. मार्सेमिकला 8,632 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया का सबसे ऊंचा दर्रा है. उन्होंने बगैर रुके हुए 55 घंटे में इस सफर को पूरा किया.

8.अरुणिमा सिन्ह
अरुणिमा एक हादसे में बायां पैर खो चुकी हैं और दाएं पैर में लोहे की रॉड पड़ी है. उनके पैर खोने की कहानी भी बेहद दर्दनाक है. राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल प्लेयर अरुणिमा को लखनऊ से दिल्ली जाते वक्त कुछ लुटेरों ने चेन छीनने की कोशिश में ट्रेन से नीचे फेंक दिया था, इस हादसे के बाद वह उन्होंने अपने पैर खो दिए लेकिन हिम्मत नहीं हारी. वह माउंट एवरेस्ट चढ़ने वाली पहली दिव्यांग महिला हैं.

9.​एच.बोनीफेस प्रभु
चार साल की उम्र में प्रभु को लकवा मार गया था. उन्होंने इसे अपने जीवन के लक्ष्यों पर हावी नहीं होने दिया और रेग्युलर स्कूल में पढ़ाई जारी रखी. कठिन परिश्रम और समर्पण की बदौलत वह वह दुनिया के मशहूर वीलचेयर टेनिस प्लेयर बने. 1998 वर्ल्ड चैंपियनशिप में उन्होंने पदक जीता. 2014 में भारत सरकार ने उनको पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया.

10.साई प्रसाद विश्वनाथन
बचपन में उनके शरीर का निचला आधा हिस्सा बेकार हो गया था और काम करना बंद कर दिया था. लेकिन उन्होंने अपनी सफलता के रास्ते में उसे बाधा नहीं बनने दिया. वह भारत के पहले स्काईडाइवर बने. वह पहले दिव्यांग भारतीय हैं, जिन्होंने 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्काईडाइविंग करके लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स में अपना नाम दर्जा कराया. मौजूदा समय में वह भारत में डेलॉइट यूएस के रिस्क कंसल्टेंट हैं. उन्होंने सहस्र नाम के संगठन की भी स्थापना की है. यह संगठन वित्तीय रूप से वंचित उन छात्रों को स्कॉलरशिप मुहैया कराता है, जिनके अंदर कुछ करने की संभावना है.
सुदर्शन खन्ना

कमाल की मुहीम-
पीरियड्स की शर्म को खत्म करने के लिए बनारस की इस लड़की ने छेड़ी ‘मुहीम’

बनारस की स्वाती सिंह बीएचयू से पढ़ी हुई हैं और लेखन का काम करने के साथ-साथ ‘मुहीम-एक सार्थक प्रयास’ नामक संस्था की फाउंडर भी हैं. इन दिनों स्वाती माहवारी के खिलाफ जारुकता फैलाने का काम कर रही हैं, जिसके लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है. स्वाती की मुहीम इस वक्त पचास से ज्यादा गांवों तक पहुंच चुकी है. अब गांव की महिलाएं सूती कपड़े की मदद से सैनिटरी बनाने में जुट गई हैं. अब तक पांच हज़ार से अधिक महिलाएं एवं किशोरियां इस मुहिम का हिस्सा बन चुकी हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है.

कमाल की हार्ट सर्जरी-
गुजरात के अक्षरधाम मंदिर में अस्पताल से करीब 32 किमी दूर बैठे सर्जन ने सफल हार्ट सर्जरी करके इतिहास रच दिया. उन्होंने टेलिरोबोटिक कोरोनरी के जरिए महिला की ऐंगियोप्लास्टी सर्जरी की और जान बचाई. यह प्रक्रिया ऑपरेशन थिअटर के कैथ लैब में मौजूद इंटरनेट इनेबल रोबोटिक आर्म के जरिए की गई, जिसे डॉ. पटेल मंदिर के परिसर में रिमोट से ऑपरेट कर रहे थे.

कमाल की हंसी-
हंसना सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है। हंसने से न सिर्फ चेहरे की एक्सर्साइज होती है बल्कि आपका तनाव दूर होता है, दिल फिट और हेल्दी रहता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि हंसने से आपकी कैलरी भी बर्न होती है. हंसना कई मर्जों की दवा है. हंसी हमारे शरीर की मांसपेशियों, आंख, जबड़ा और हृदय की मांसपेशियों को आराम देती है. एक शोध के अनुसार, खुलकर हंसने वालों का रक्त संचार काफी बेहतर रहता है. 10 मिनट तक ठहाके लगाकर हंसने से आपको 2 घंटे तक दर्द से राहत मिल सकती है. हंसने से
दिनभर बनी रहेगी स्फूर्ति
दिल होगा तंदरुस्त
कैलरी घटेगी
स्पॉन्डेलाइटिस में आराम
प्रतिरक्षातंत्र मजबूत
तनाव से मुक्ति

कमाल की कुकिंग क्वीन-
यूट्यूब पर मस्तनम्मा का सफर 2016 में शुरू हुआ जब वह 105 साल की थीं. तब उनके पोते लक्ष्मण ने उनका पहला विडियो यूट्यूब पर अपलोड किया था. इस विडियो में वह बैंगन करी बनाते हुए दिखीं. यह विडियो इतना लोकप्रिय हुआ कि लक्ष्मण उनके अलग-अलग लजीज रेसिपी वाले विडियो बनाकर यूट्यूब पर डालने लगा. पारंपरिक तरीके से खाना बनाने के लिए देश-विदेश में मस्तनम्मा काफी लोकप्रिय हो गई थीं. मस्तनम्मा की लजीज रेसिपी की दुनिया भर में चर्चा रही. 107 साल की उम्र में मस्तनम्मा का अभी हाल ही में निधन हो गया.

कमाल के जवान-
मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन पर दो महिलाएं चलती ट्रेन से उतरने के दौरान प्लैटफॉर्म पर गिर गईं. उनकी किस्मत अच्छी थी, कि ट्रैक पर गिरने से पहले ही जीआरपी के जवानों ने उन्हें पकड़ लिया. दोनों चलती हुई लोकल ट्रेन से उतरने की कोशिश कर रही थीं. पूरी घटना की सीसीटीवी फुटेज सामने आई है.

इसी के साथ ‘किस्से कमाल के’ की इस कड़ी को हम यहीं पर विराम दे रहे हैं. आप भी कामेंट्स में कमाल के अन्य किस्से भेज सकते हैं. कामेंट्स में आए आपके कमाल के किस्से अगली कड़ी में आप अपने नाम से देख पाएंगे.

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244

One thought on “कमाल के किस्से-22

  • लीला तिवानी

    कमाल की रेल-

    Train 18: कुंभ से पहले दौड़ेगी देश की पहली हाईस्पीड रेल!

    केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि देश की सबसे तेज दौड़ने वाली मौजूदा ट्रेन से भी यह ट्रेन तेज चलेगी और एक तरह से लगभग 45 फीसदी वक्त की बचत होगी।

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