कविता

माननि के प्रति

प्रिये   कहाँ   से   आ   रही,
प्रिये   कहाँ   पर  जा  रही।
किसके आगमन पर राह मे,
हृदय    कुसुम   वीछा  रहीं।
नेह  नयन भर   छा रही,
सांस – सांस   गा    रही।
अग्निपथ  का पथिक है,
तो क्यो  गले  लगा  रही।
पग-पग  गली  हो चाह मे,
पग-पग जली हो आह मे।
गीत  की एक  गंध  लेकर,
पग-पग  चली हो  राह मे।
तुम निशीथ मे क्यो आती है,
मेरे  हृदय  को छू  जाती  है।
अनजाने    राहों   मे  पंकज,
नेह  नयन  भर  दे  जाती है।
सपना   नया    दिखाने   आती,
अपना   किसे   बनाने   आती।
मरा   हुआ   पाषाण   हृदय  है,
उसको क्यो गीत सुनाने आती।
तुम उसको आज बुला लेना,
अमृत रस  बूद  पिला  देना।
जो रजनी  मे  जाग  रहा  है,
प्रिये उसको गीत सुना देना।
प्रिये  तुम्हारी  बारी  है,
प्रेम  प्रेम  पर  भारी है।
जीवन के हर मोड़ पर,
हम  तेरे   आभारी  हैं।
कहा  बात  तुम्हारी  टारी है,
मेरी  नेह गगरिया खाली है।
तुम  बागों की  फूल मनोहर,
हम   बागों   के   माली   है।
अब  नही  ओ  बात है,
अब  नही ओ  रात  है।
प्यार  के  इस  राह  मे,
हर जगह  हिमपात है।
जब    नही   ओ  साथ   है,
बस   नैन  से   बरसात  है।
जल रहा है  जल मे पंकज,
उड़ती  गगन  मे   राख  है।
क्यो  मीत  मेरा  सो  गया,
क्यो  गीत  मेरा  रो  गया।
अनगिनत निधिया हमारी,
फिर आज कैसे खो गया।
पीर   की   यह   राह  है,
दे   गयी   ओ   आह  है।
स्वप्न मे  हमको  तुम्हारी,
अब  नही  ओ  चाह  है।
यहा  टूट   गया  आज  मै,
यहा  लूट  गया  आज  मै।
प्रीति  की  माला  बनी  तो,
क्यो  छूट  गया  आज  मै।
सब जानकर  के चले  गये,
सब  मानकर  के चले गये।
जितने अनकहे मेरे गीत थे,
सब दान कर के चले  गये।

— पंकज कुमार शुक्ल ‘प्राणेश’

पंकज कुमार शुक्ल

1.रचनाकार का पूरा नाम-पंकज कुमार शुक्ल 2.माता का नाम-श्रीमती अमरावती शुक्ला 3.पिता का नाम-श्री महातम शुक्ल 4.पत्नी का नाम-श्रीमती पुष्पा शुक्ला 5.स्थाई पता- ग्राम-पुरैना शुक्ल पोस्ट-करायल शुक्ल तहसील-बरहज जनपद-देवरिया उत्तर प्रदेश पिन कोड-274603 6.फ़ोन एव ह्ववाटसप नम्बर:9838789538 7.जन्म तिथि:15- 007-1979 8--शिक्षा- परास्नातक (हिन्दी,प्राचीन इतिहास) दी•उ•वि•वि•गोरखपुर बीएड- दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर साहित्य विशारद- सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी 9.व्यवसाय-शिक्षक,प्रधानाध्यापक, बेसिक शिक्षा परिषद,उत्तर प्रदेश 10.प्रकाशन विवरण-लेखन विधा में कविता,लेख,मोटिवेशनल कोट्स,कहानी,निबंध,समीक्षा,गजल और लघुकथा लिखता हूँ। वर्तमान में लगभग 200 से उपर कविताएँ रचनाएँ अमेरिका यू एस ए,नेपाल,एवं भारत के विभिन्न दैनिक,साप्ताहिक एवं सांध्य समाचार पत्रों और मासिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। ऑनलाइन प्रकाशन-प्रतिलिपि, साहित्यिक पत्रिका साहित्यनामा,शब्द सागर पत्रिका, स्वैच्छिक दुनिया पत्रिका,काब्य रंगोली पत्रिका,भारत माता की जय पत्रिका आदि में विभिन्न रचनाएँ प्रकाशित हैं। 11.सम्मान विवरण- विश्व हिन्दी रचनाकार मंच द्वारा- श्रेष्ठ सृजनकार सम्मान एवं रानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल अवार्ड। अटल साहित्य अकादमी द्वारा- अटल काब्य रत्न सम्मान। साहित्य संगम संस्थान द्वारा- श्रेष्ठ टिप्पणीकार सम्मान,श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान और समीक्षाधीश सम्मान विश्व जन चेतना ट्रस्ट भारत द्वारा- साहित्य वट सम्मान,साहित्य गौरव सम्मान। काब्याजलि साहित्यिक समूह भोपाल द्वारा- साहित्य सारथी सम्मान। काब्य रंगोली साहित्य संस्थान द्वारा- साहित्य भूषण सम्मान,साहित्य साधक सम्मान। बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा-बेसिक गौरव सम्मान,उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान। विश्व हिन्दी संस्थान द्वारा- मातृभूमि गौरव सम्मान। सैनिक सेवा परिषद द्वारा-भारत भाल सम्मान। बाबा राघवदास सेवा संस्थान द्वारा- उत्कृष्ट उदघोषक सम्मान,श्रेष्ठ संचालक सम्मान से मुझे सम्मानित किया गया है। एक शिक्षक के रूप में अपना कार्यनिर्वहन करने के साथ ही मैं कई समाजिक और साहित्यिक और शैक्षणिक संस्थानों से सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जुड़ा हूँ।लेखन के क्षेत्र में आने का मेरा मुख्य उद्देश्य समाजिक बुराईयों के प्रति जनजागरण करना,नशा मुक्त समाज बनाना,पर्यावरण संरक्षण करना,राष्ट्र से जुड़ी समस्याओं को मुखरित करना है। आपके प्रतिष्ठित मंच के से जुड़कर और आप सभी यशस्वी मनीषियों से मिलकर मेरे इस उद्देश्य को सही दिशा मिलेगा इसी आशा के साथ आपको अपना जीवन परिचय प्रेषित रहाँ हूँ।आशा है आप अवश्य विचार करेगे।