कविता

एक न एक दिन 

एक न एक दिन 
मेरी कोशिशें रंग लाएंगी;
एक न एक दिन
सूरज की किरणें घर आएंगी!
 
एक न एक दिन 
मेरी कमी  का एहसास होगा;
एक न एक दिन 
मेरा हर विचार तुम्हारे पास होगा!
 
एक न एक दिन 
पतझड़ का मौसम बीतेगा;
एक न एक दिन 
मेरा मन भी जीतेगा!
 
एक न एक दिन 
वो गीला रुमाल भी हवा से सूखेगा;
एक न एक दिन 
वो झूठा अहंकार भी टूटेगा!


~रूना लखनवी

रूना लखनवी

नाम- रूना पाठक उप्पल (रूना लखनवी) पता- दिल्ली, भारत मैंने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से विज्ञान में स्नातकोत्तर किया है। वर्तमान में, मैं एक फार्मास्युटिकल कम्पनी में वरिष्ठ प्रबंधक की तरह कार्यरत हूँ। साहित्यिक उपलब्धि :- वूमेन एकस्प्रेस, दक्षिण समाचार प्रतिष्ठा, आज समाचार पत्र , कोलफील्ड मिरर , अमर उजाला काव्य (ऑनलाइन) , पंजाब केसरी (ऑनलाइन) , मॉम्सप्रेस्सो में कविताएँ, लघु कथा कहानी, स्वतंत्र अभिव्यक्ति की रचनाएँ प्रकाशित। सम्पर्क https://www.facebook.com/Runa-Lakhnavi-108067387683685 सम्मान: 1. मॉम्सप्रेस्सो हिन्दी लेखक सम्मान; 2. राष्ट्रीय कवयित्री मंच- नारी शक्ति सम्मान 2020 3. साहित्य संगम संस्थान- सम्मान 4. अभिनव साहित्यिक मंच - सम्मान