कविता

अहंकारी और स्नेहिल शब्द

सिर्फ स्नेह लिए शब्द नहीं चाहिए,
क्योंकि इससे पेट नहीं भरते.
आजतक, अलजजीरा, रवीशों को कैसे सुनूँ,
क्योंकि सिर्फ रेडियो ही पास है.
पेट और रेडियो ने मिलकर
रामायण, महाभारत को हमसे दूर कर दिए !
अखबारों ने दगा दिए,
तो नागार्जुन जैसों ने अकाल के बाद कविता रच दिए !
अब तो हमारे पास देने को सचमुच में कुछ नहीं हैं
लेने को मन करता है,
पर स्वाभिमान धमकाते हैं पल-पल
सरकार सिर्फ कामातुर स्त्री की भाँति है,
जो फँसाना जानती है !
तो फिर हमें एक स्लेट-खड़िया दे दो,
ताकि स्वयं भाग्य लिखूँ और मिटाते जाऊँ !
अहंकार शब्द और अहंकारी लोग
सनकी और ज़िद्दी क्यों होते हैं ?
तभी तो हम शून्य के आविष्कार के बाद
खोज के नाम पर अबतक शून्य पर ही अटके हैं !
त्रेता में खर-दूषण थे,
पर अब तो यहाँ सिर्फ व सिर्फ प्रदूषण है,
हवा-पानी भी फ्री में नहीं
और बह रही यहाँ प्लास्टिक की नदी है,
यह करप्टयुग है,
तेरे-मेरे सपने का 21वीं सदी नहीं !

डॉ. सदानंद पॉल

एम.ए. (त्रय), नेट उत्तीर्ण (यूजीसी), जे.आर.एफ. (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार), विद्यावाचस्पति (विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर), अमेरिकन मैथमेटिकल सोसाइटी के प्रशंसित पत्र प्राप्तकर्त्ता. गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स इत्यादि में वर्ल्ड/नेशनल 300+ रिकॉर्ड्स दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 12,000+ रचनाएँ और संपादक के नाम पत्र प्रकाशित. गणित पहेली- सदानंदकु सुडोकु, अटकू, KP10, अभाज्य संख्याओं के सटीक सूत्र इत्यादि के अन्वेषक, भारत के सबसे युवा समाचार पत्र संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में अर्हताधारक, पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.