कविता

कुछ तो बात है

यूँ ही नहीं
खिलता, महकता, बहकता दिल
गुम तेरी यादों में
कुछ तो बात है
जो ये दिल मेरी सुनता नहीं
बस रहता है भागता तेरी ओर
खो सुध बुध सारी ।।
हो मौसम कोई भी
तपती गर्मी
ठंडी  सर्दी
रिमझिम बरखा
बसंत या पतझड़
कम होती नहीं चाहत
इस दिल की
बस रहता है तड़पता
मिलने को तुझ से
सही जाती नहीं पीड़ा
ये विरह की
कुछ तो बात है
तेरे और मेरे बीच में
जो खलती ये विरह इतनी ।।
प्यार का बंधन है ये कुछ खास तेरा मेरा
तभी तो कुछ तो बात है
खास
रिश्ते में हमारे बना बस एक दूजे के लिए
जो विरह में भी खोज लेता पल अपनेपन
ओढ़ तेरी यादों को
कुछ तो है न खास हम में और तुम में
जो मिले इस तरह नसीबों से।।
— मीनाक्षी सुकुमारन

मीनाक्षी सुकुमारन

नाम : श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन जन्मतिथि : 18 सितंबर पता : डी 214 रेल नगर प्लाट न . 1 सेक्टर 50 नॉएडा ( यू.पी) शिक्षा : एम ए ( अंग्रेज़ी) & एम ए (हिन्दी) मेरे बारे में : मुझे कविता लिखना व् पुराने गीत ,ग़ज़ल सुनना बेहद पसंद है | विभिन्न अख़बारों में व् विशेष रूप से राष्टीय सहारा ,sunday मेल में निरंतर लेख, साक्षात्कार आदि समय समय पर प्रकशित होते रहे हैं और आकाशवाणी (युववाणी ) पर भी सक्रिय रूप से अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहे हैं | हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रहों .....”अपने - अपने सपने , “अपना – अपना आसमान “ “अपनी –अपनी धरती “ व् “ निर्झरिका “ में कवितायेँ प्रकाशित | अखण्ड भारत पत्रिका : रानी लक्ष्मीबाई विशेषांक में भी कविता प्रकाशित| कनाडा से प्रकाशित इ मेल पत्रिका में भी कवितायेँ प्रकाशित | हाल ही में भाषा सहोदरी द्वारा "साँझा काव्य संग्रह" में भी कवितायेँ प्रकाशित |