राजनीति

देश के विकास में प्रत्येक नागरिक की समान भागीदारी

देश को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली और तिरंगा नीले आसमान में गौरव से लहराया। हमारा संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था। हमारा संविधान विश्व का सबसे बड़ा सविधान है। स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद बने। संविधान सभा द्वारा भीम राव अम्बेडकर को प्रारूप समिति का अध्यक्ष चुना गया।। दो वर्ष ग्यारह माह और अट्ठारह दिन के बाद संविधान बनकर तैयार हुआ तो डॉक्टर भीम राव अम्बेडकर ने  संविधान सभा में अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद के सामने पेश किया।
भारत को लोकतंत्रात्मक  गणराज्य की संज्ञा दी गयी। हमारे सविधान में यह खास संकल्प है कि देश का हर नागरिक अपना धर्म मानने के लिये भी स्वतंत्र है । ऊँच नीच का भेद भाव कतई नहीं बरता जाएगा और तक़्क़ी के तमाम दरवाज़े सबके लिये समान रूप से खुले रहेंगे।सबको अपने विचार प्रकट करने की पूरी स्वतंत्रता होगी। देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्य रखा जाएगा। हमारे गणतंत्र के प्रथम प्रधानमंत्री जी का कथन था।””आज़ादी का अर्थ होता है गिरे हुए को उठाना और सबको साथ लेकर आगे बढ़ाना”” हमेशा सोचिये की हम अपने देश के लिये क्या कर सकते हैं। देश भक्ति एक ऐसा एहसाह है जो हर एहसास से बढ़कर होता है। गण तंत्र दिवस हमारा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है। इस दिन देश के सभी नर नारी खुशी से झूम उठते हैं। जगह जगह राष्ट्र ध्वज तिरंगा फहराया जाता है। मगर सविधान का पालन करने के लिये हमें अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना होगा। जो भी नियम बनाये जाते हैं जनता की भलाई खुशहाली के लिये बनाये जाते हैं। जब तक हम उन विधानों का सही तऱीके से पालन नहीं करते हमारी तरक़्क़ी के रास्ते सबके लिये समान रूप से नहीं खुल सकते। जब भी कोई अपने काम से जी चुराता है , वो देश का ही नुकसान करता है। जब भी कोई किसी नियम का उलंघन करता है , वो अपनी हरकतों से राष्ट्र को ही क्षति पहुचाता है। मगर राष्ट्र की सम्मति भी तो आम जनता की ही है।अतः राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचा कर हम अपना ही नुख्सान करते हैं। हमारे सविधान में हर अधिकार के साथ कर्तव्य भी जुड़ा होता है।हमें  कोई भी विचार और धर्म मानने या अपनाने का हक़ है। मगर सभी विचारों और धर्मो के प्रति समान रूप से आदर भाव रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। साक्षर , अहिंसक, शोषण विहीन और समतामूलक समाज की स्थापना हमारे सविधान का मूल मंत्र है। इसलिए भारत के प्रत्येक व्यक्ति के ह्रदय में देश भक्ति , देश हित, और देश विकास की भावना होनी चाहिए , और एक बेहतर नागरिक की तरह जीवन जीना चाहिये।
— आसिया फ़ारूक़ी

*आसिया फ़ारूक़ी

राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका, प्रधानाध्यापिका, पी एस अस्ती, फतेहपुर उ.प्र