गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लिखी उसने यारों गजल क्या क़लम है।
भरी थी मुहब्बत से फिर आँख नम है।।
तेरी आँखें क्यूं इस कदर बह रही है।
बता तो सही किसने किया सितम है।।
तेरा हालेदिल कह रही मौन तेरी।
जरा कह दे गम दिल का तुझे कसम है।।
कहीं रो न दें गम में तेरे यार मेरे।
तेरी आह में लग रहा गम ही गम है।।
कभी लौट कर आयेगी फिर सहर यूं।
सहर होने तक प्यारे कायम ये तम है।।
झुका सिर खुदा की तू कर ले इबादत।
इबादत में होता तुझे क्यूं भरम है।।
जिसे लाये हो करके फेरे निभाना।
भले साथ लायी नही वो रक़म है।।
— प्रीती श्रीवास्तव

प्रीती श्रीवास्तव

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