कविता

लाडली बेटियां!

लाडली बेटियां!
सौभाग्य लेकर आती हैं बेटियां,
सपने सजाती आती हैं बेटियां,
रुमझुम, छमछम पायल की,
मधुरिम आह्लाद लाती हैं बेटियां।।
जीवन की ये फुलवारियां,
घर-आंगन में डोलती कलियाँ,
मीठी मीठी सुरमई साज-सी,
चहकती, गुनगुनाती चिड़ियां।।
थिरकती सुंदर मनमयूरी-सी,
सुरभित अलमस्त पवन-सी,
दिल का साज श्रृंगार सुहाना,
सुहासी, गुलजार गुलशन-सी।।
रौनक, बहार जीवन-बाग की,
प्रेमरंग रसधार बूंदे बारिश की,
मधुरिम आनंद, सुकून सौगात,
उजास, उल्लास, उमंग जीवन की।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

2 thoughts on “लाडली बेटियां!

  • *लीला तिवानी

    चंचल जी, बहुत खूब! “रुमझुम, छमछम पायल की,
    मधुरिम आह्लाद लाती हैं बेटियां।।” इतनी सुंदर कविता के लिए बधाई.

    • *चंचल जैन

      आदरणीय लीला दीदी, सादर प्रणाम।
      बेटियां हमारे दिल के आसपास होती हैं, लहलहाती  बालियों-सी, मंदिर की मधुर घंटियों-सी।
      आपका प्रोत्साहन पाकर मनमयूर हर्षित हो रहा हैं।
      बहुत बहुत धन्यवाद। सादर  

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