कविता

परिंदा

तू परिंदा तुझको उड़ना आसमाॅं में
इसी से तुझको जाने सब जहाॅं में
माना बाधाएं तो आएंगी
माना अंधियारा छाएगा
तू उड़ता जा आगे आगे
कौन यहाँ टिक पाएगा
दुनिया देखे कौशल-तेरा जहाॅं में
तू परिंदा तुझको उड़ना आसमाॅं में
सब देख रहे अंबर ऊंचा
तू अपना पर फैलाएगा
देखने वाले केवल देखें
तू ही मंजिल पाएगा
तू पर फैला हौसला दिखा जहाॅं में
तू परिंदा तुझको उड़ना आसमाॅं में
— आर्यन मिश्र

आर्यन मिश्र

पता - हरिपाल मऊ, रानीगंज, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश शिक्षा - स्नातक तृतीय वर्ष सम्पर्क सूत्र - 9026869753