कविता

एक मुलाकात हिमालय के साथ

वल उज्जवल वृहद विशाल
शालिनता की हो जैसे कोई मिसाल
सम्मुख उसके सभी झुकते
क्या निर्धन क्या धनवान —-!
बर्फिली धवल चोटी उसकी
उसके आनन में दिव्य प्रकाश
जिसके कण-कण में महादेव का वास
बादल करती जिसका श्रृंगार
जीवनदायिनी नदियों का वह उद्गम स्थान
जिसे सजाती देवदार की कतार
उसके आनन में तारों की बहार
वो है जीवनदायिनी जड़ी बूटियों की खान
दुर्लभ जीवों का निवास -स्थान
जिसकी गोद में है मनमोहक फूलों की बहार
मानव तुझको किसका अभिमान
बस एक बार देख ले पर्वत विशाल
दंभ तेरे मिट जाएंगे
भ्रम सभी दूर हो जाएंगे
नश्वर क्षणभंगुर जीवन तेरा
शाश्वत है वो पर्वत विशाल
सदा करो हिमालय का सम्मान!!!
— विभा कुमारी “नीरजा”

*विभा कुमारी 'नीरजा'

शिक्षा-हिन्दी में एम ए रुचि-पेन्टिग एवम् पाक-कला वतर्मान निवास-#४७६सेक्टर १५a नोएडा U.P