कविता

तन्हा दिल

तन्हा दिल तेरी यादों के है साये
तन्हाई में मेरा दिल क्यूॅ घबराये
अक्स तेरी जब निगाहों में आये
फिजां में नशा प्यार की घुल जाये

रे चन्दा तुँ छ्त पर मेरी आ जाना
चॉदनी को भी अपने संग है लाना
दिल बहला लेगें वो जब जब आये
फिजां में नशा प्यार की घुल जाये

रे पपीहा मत दो तुम हमें ताना
सुख दुःख का  है आना जाना
गैरों को हम क्यूं अपना बनायें
फिजां में प्यार की नशा घुल जाये

अमवा की डाली पे कोयलिया है काली
पूरवाई संग संग चले है मवाली
चलो गॉव के पीपल तले घूम आयें
फिजां में प्यार की नशा घुल जाये

कह दो कोई बेशर्म आसमान से
बादल ने की है वर्षा की वो वादे
झींगुर तेरी आस में सुर  सजाये
फिजां में प्यार की नशा घुल जाये

— उदय किशोर साह

उदय किशोर साह

पत्रकार, दैनिक भास्कर जयपुर बाँका मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार मो.-9546115088