गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जब तलक खून में वो रवानी न हो।
जोश से जो भरी ये जवानी न हो।।

जिन्दगी का न मतलब कोई दोस्तो,
इन आँखों में जब तक ये पानी न हो।।

इश्क करने की अब तो खुआइयिश नही,

काश ये फिर से हमसे नादानी न हो।

अब तो मरना ही होगा वतन के लिए ,
सड़को पे धुलमिल ये जवानी न हो।

दिल को अपने भी अब परिंदा करो।
भूल जाये जिसे वो कहानी न हो।।

— वीणा चौबे

वीणा चौबे

हरदा जिला हरदा म.प्र.