कविता

अधूरा_

दिन सिमटने लगे,
विस्तार अपना मिटाकर
काँस के फूल
उत्सवों के
प्रतिनिधि बने,
हरे-भरे खेत
सोने की बालियां पहने
घरों में जाने का
इंतजार करने लगे,
उमस भरी दुपहरी
कुम्हलाने लगी,
तपता-कुढ़ता मौसम
शरद का प्रेम
स्वीकारने लगा,
तपती धरती
शीत के आगमन से
हौले से मुस्कुराने लगी
सब कुछ है यहाँ
फिर भी कुछ अधूरा है
पूनम का चाँद ,
आधा तुम्हारा
आधा मेरा है….!

— सविता दास सवि

सविता दास सवि

पता- लाचित चौक सेन्ट्रल जेल के पास डाक-तेजपुर जिला- शोणितपुर असम 784001 मोबाईल 9435631938 शैक्षिक योग्यता- बी.ए (दर्शनशास्त्र) एम.ए (हिंदी) डी. एल.एड कार्य- सरकारी विद्यालय में अध्यापिका। लेखन विधा- कविता, आलेख, लघुकथा, कहानी,हाइकू इत्यादि।