कविता

चलो पावन दीप जलाएँ

चलो हम, पावन दीप जलाएँ
और धारा में , उजियारा लाएँ
घर-आंगन हो उजला-उजला
तन-मन का अँधियारा भगाएँ।

कोई नही क्लेश, अशांत रहे
जगमग ज्योति  दिन रात रहे
जीवन से  दुखों, का अंत रहे
नव-सूर्योदय ,नव-प्रभात रहे।

दीपों का आया है प्यारा पर्व
सद्भावनाओं का निभाएँ धर्म
इस दिवाली कुछ अच्छा करें
दूर हो दुष्टवृतियाँ और अधर्म।

तन-मन स्वस्थ हो प्रफुल्लित
यह जगत सारा हो आंनदित
सभी का जीवन, बने मधुबन
जनजन सुखमय हों सुरभित।

मन से सारे, हम दुर्गुण हटाएँ
सद्गुण का हम भावना लाएँ
यहाँ कोई अब, दुखी मत रहे
यह दिवाली, खुशहाली लाए।

— अशोक पटेल “आशु”

*अशोक पटेल 'आशु'

व्याख्याता-हिंदी मेघा धमतरी (छ ग) M-9827874578