गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उदासी क्यों रही छायी बता क्या है
तन्हा ही दिल रहे अब तो ख़ता क्या है

बताते क्यों नहीं हमको कहाँ रहते
कहो दिल में अभी तक भी छुपा क्या है

करें हम प्यार तुझसे ही कहो अब तो
ख़फ़ा मत हो बता तेरी रज़ा क्या है

उठे अब दर्द दिल में ही सहें कैसे
यही पूछें तुझी से ही दुआ क्या है

चले तुम तो गये रूठे न आओगे
अभी लौटे न तुम तब तो रहा क्या है

तुझे चाहा सराहा भी रखा दिल में
बता दे दिल लगाने की सज़ा क्या है

अभी तक की नहीं कोई ख़ता कह दो
चली अब बेवफ़ाई की हवा क्या है

— रवि रश्मि ‘अनुभूति’