कविता

सबके राम का संदेश

बाइस जनवरी दो हजार चौबीस का दिवस
विशेष ही नहीं इतिहास बन गया,
एक अदद अयोध्याधाम विश्व में
सर्वाधिक चर्चा का केंद्र बन गया।
हमारे राम लला की धमक दुनिया ने देखी
उनके विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा भर से
देश दुनिया में एक अद्भुत दीवाली की रोशनी देखी।
हर ओर जय श्रीराम का उद्घोष हो रहा था
जो जहाँ था वहीं हर्षोल्लास से नाच गा रहा था
सारा हिंदुस्तान राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को
अपना अपना बड़ा सौभाग्य मान रहा था।
आज की पीढ़ी तो खुद को धन्य मान रही थी,
जिस सपने के साकार होने की प्रतीक्षा करते
हमारे, आपके, उनके पुरखे भौतिक दुनिया को
अपने सपने अगली पीढ़ी को सौंप अलविदा होते गए,
वे पुरखे भी आज धन्य हो बहुत खुश हो गये,
परम धाम में वे भी आज भावविह्वल होते रहे,
हम सबकी नजरों से मंदिर निर्माण और
प्राण प्रतिष्ठा के हर दृश्य को अपने में
आत्मसात करते हुए अत्यंत गर्वित, प्रफुल्लित हुए।
आज की पीढ़ी को रामकृपा का बड़ा सौभाग्य कह रहे
अपने आपको आज की पीढ़ी का ऋणी मान रहे।
जबकि आज की पीढ़ी इसे पुरखों का आशीर्वाद मान बहुत खुशी से हो उछलती रही,
उन सबकी ओर से श्रीराम जी को बार बार
अनंत भाव पुष्प अर्पित कर रही ।
राम मंदिर निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा से
सब बार बार भावुक होते रहे,
राम जी से अपनी और अपनों की हर भूल
माफ़ करने की प्रार्थना करते रहे,
राम हमारे आराध्य, राम ही जीवन मंत्र हैं
बड़े गर्व से यह बात सारी दुनिया को
आज फिर से समझाने लगे हैं,
जितने विरोधी हैं सारी दुनियां में राम के
उन सबको एक बार राममंदिर में आकर
राम जी के चरणों में नतमस्तक होने
और “सबके राम” का पाठ पढ़ाने लगे हैं।
यह और बात है कि कुछ सिरफिरों को
इतनी सीधी सी बात समझ में आने वाली नहीं है,
क्योंकि प्रभु रामजी की महिमा उन्होंने जानी कहाँ है?
राम और राम मंदिर विरोध के अलावा
उनकी अपनी कोई कहानी जो नहीं है।

*सुधीर श्रीवास्तव

शिवनगर, इमिलिया गुरूदयाल, बड़गाँव, गोण्डा, उ.प्र.,271002 व्हाट्सएप मो.-8115285921