कविता

सकून की तलाश

ज़िन्दगी चौराहे पर है खड़ी,

              मन में बातें चली है बड़ी बड़ी,

               लगी है विचारों के द्वंदो की झड़ी,

                   फिर लगता है 

ज़िन्दगी क्यूं है ऐसे मायूस पड़ी,

              कुछ पल सुहाने से लगते हैं सिर्फ कुछ घड़ी,

              फिर लगता है जिंदगी इधर उधर है बिखरी पड़ी ,

       खट्टे मीठे एहसास है ज़िन्दगी,

           ढूंढ रही है हर चौराहे पर सकून,

          परंतु ये तो अपने ही हिसाब से हुए जा रही है अफलातून,

           ज़िन्दगी हर चौराहे पर ढूंढ रही है सकून,

    सुखद एहसास भी है ज़िन्दगी,

          तो प्रश्नों की खान भी है ज़िन्दगी, 

           बस सकून की तलाश में है ज़िन्दगी,

         सिर्फ सकून की तलाश में है ज़िन्दगी,

        “जय” क्यूं सोचता है इतना ज्यादा,

        इन खट्टे मीठे पलों का एहसास ही है ज़िन्दगी।

— डॉ. जय महलवाल

डॉ. जय महलवाल

लेफ्टिनेंट (डॉक्टर) जय महलवाल सहायक प्रोफेसर (गणित) राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर कवि,साहित्यकार,लेखक साहित्यिक अनुभव : विगत 15 वर्षो से लेखन । प्रकाशित कृतियां : कहलूरी कलमवीर,तेजस दर्पण,आकाश कविघोष ,गिरिराज तथा अन्य अनेक कृतियां समाचार पत्रों एवम पत्रिकाओं में प्रकाशित प्राप्त सम्मान पत्रक या उपाधियां : हिंदी काव्य रत्न २०२४, कल्याण शरद शिरोमणि साहित्य सम्मान२०२२, कालेबाबा उत्कृष्ठ लेखक सम्मान२०२२,रक्तसेवा सम्मान २०२२ 22 बार रक्तदान कर चुके हैं। (व्यास रक्तदान समिति, नेहा मानव सोसाइटी, दरिद्र नारायण समिति देवभूमि ब्लड डोनर्स के तहत) महाविद्यालय में एनसीसी अधिकारी भी हैं,इनके लगभग 12 कैडेट्स विभिन्न सरकारी (पुलिस,वन विभाग,कृषि विभाग,aims) सेवाओं में कार्यरत हैं। 1 विद्यार्थी सहायक प्रोफेसर और 1 विद्यार्थी देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT में सेवाएं दे रहे हैं। हाल ही में इनको हिंदी काव्य रत्न की उपाधि (10 जनवरी) शब्द प्रतिभा बहुक्षेत्रीय सम्मान फाउंडेशन नेपाल द्वारा नवाजा गया है। राष्ट्रीय एकता अवार्ड 2024 (राष्ट्रीय सर्वधर्म समभाव मंच) ई– ०१ प्रोफेसर कॉलोनी राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर हिमाचल प्रदेश पिन १७४००१ सचलभाष ९४१८३५३४६१