क्षणिका मुखोटे *ब्रजेश गुप्ता 03/03/202505/03/2025 मुखोटे पहन हम जी रहे कृतिम मुस्कुराटे बिखेर रहे अंदर कटुता से भरे बाहर मधुर मधुर गीत बोल रहे