कुण्डली/छंद

धन्य-धन्य हो जाता जीवन

ले कावड़ दर्शन अभिलाषा।
झर-झर झरती भक्ति मनीषा।।
नील कंठ प्रभु शिव कैलाशा।
कृपा छत्र हिय संबल आशा।।
गंगा जल कावड़ भर लाये।
शिव शंभो अभिषेक सुहाये।।
पाप-पुण्य का लेखा जोखा।
धर्म-कर्म हो शुभदा चोखा।। 
भक्ति-भाव हिय मंगल धारा।
पावन निर्मल शुभ उजियारा।
बम-बम भोले का जयकारा।
जीवन नैया तारण हारा।।
महादेव की महिमा गाते।
पूजन अर्चन बहु सुख पाते।।
पाप-कर्म छुटकारा पाता।
धन्य-धन्य जीवन हो जाता।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८