कविता

नामोनिशान मिट जाएगा

एक दिन यूं हो जाएगा
ये जहान जन्नत हो जाएगा
जब इंसान का नामोनिशान
मिट जाएगा इस जहान से !

पेड दरख्त नदी पहाड़ झरने
कुदरत के सामान जितने
सभी बच जाएगे
गर इंसान का नामोनिशान
मिट जाएगा इस जहान से !

सच झूठ फरेब दगा
धर्म अधर्म नफा-नुकसान
ईमानदारी बेईमानी
पाप पुण्य और कर्म का
हिसाब किताब खत्म हो जाएगा
गर इंसान का नामोनिशान
मिट जाएगा इस जहान से !

एक दिन यूं हो जाएगा
ये जहान जन्नत हो जाएगा !

— विभा कुमारी “नीरजा”

*विभा कुमारी 'नीरजा'

शिक्षा-हिन्दी में एम ए रुचि-पेन्टिग एवम् पाक-कला वतर्मान निवास-#४७६सेक्टर १५a नोएडा U.P