नन्हे ढोल
नन्हा ढोल गले में आया,
ढम-ढम करके गीत सुनाया।
टुन-टुन, ढम-ढम धुन बजाते,
आँगन भर में रौनक लाते।
छोटे हाथों ने जब बजाया,
आँगन सारा तब हर्षाया।
एक बच्चा आगे-आगे चला,
दूजा उसके संग में चला।
कदम-कदम पर ताल मिलाई,
खुशियों की धुन सबने पाई।
हँसी बिखेरी, खेल रचाया,
नन्हे मन ने रंग जमाया।
ढोल बजे तो मन लहराया,
हर चेहरा खिल-खिल मुस्काया।
नन्हे कदम जब ताल मिलाएँ,
घर-परिवार में खुशियाँ छाएँ।
मिल-जुल कर खुश रहना रे,
मासूम बचपन का सपना रे।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
