बाल कविता

नन्हे ढोल

नन्हा ढोल गले में आया,
ढम-ढम करके गीत सुनाया।

टुन-टुन, ढम-ढम धुन बजाते,
आँगन भर में रौनक लाते।

छोटे हाथों ने जब बजाया,
आँगन सारा तब हर्षाया।

एक बच्चा आगे-आगे चला,
दूजा उसके संग में चला।

कदम-कदम पर ताल मिलाई,
खुशियों की धुन सबने पाई।

हँसी बिखेरी, खेल रचाया,
नन्हे मन ने रंग जमाया।

ढोल बजे तो मन लहराया,
हर चेहरा खिल-खिल मुस्काया।

नन्हे कदम जब ताल मिलाएँ,
घर-परिवार में खुशियाँ छाएँ।

मिल-जुल कर खुश रहना रे,
मासूम बचपन का सपना रे।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

*डॉ. प्रियंका सौरभ

रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, कवयित्री, स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार, (मो.) 7015375570 (वार्ता+वाट्स एप) facebook - https://www.facebook.com/PriyankaSaurabh20/ twitter- https://twitter.com/pari_saurabh