कुण्डली/छंद

प्रणव छंद 

रंगों की अनुपम रंगोली।

भावों से गपशप संजोली।।

धारा पावन बढती आगे।

जो ज्ञानी हरपल हैं जागे।।

पानी सा मन उपकारी हो।

सच्चा साज सुखद क्यारी हो।।

राधा प्रेम लगन तारी है।

कान्हा की सरगम प्यारी है।।

झूमे मोर मगन हो नाचे।

बूँदों की सरगम वो बांचे।।

प्रेमी गीत मधुर हैं गाएं।

साथी का सँग हिय हर्षाएं।। 

प्राची रौनक भर लाई है।

चेती सृष्टि रमण छाई है।।

फूलों को अलि मन भाए हैं।

बागों में सुर लहराए हैं।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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