सामाजिक

आत्ममुग्ध व्यक्ति को पहचाने

यदि आप जानते हैं कि आपका कोई परिचित व्यक्ति आत्ममुग्ध (नार्सिसिस्ट) है, तो फिर आपको उसे छोड़ देना चाहिए। जब तक आप ऐसे लोगों से दूर नहीं होंगे, तब तक आपका मानसिक शोषण जारी रहेगा। अपने लिए सबसे अच्छा निर्णय है — आत्ममुग्ध लोगों से दूरी बना लेना।
अधिकांश लोग आत्ममुग्ध व्यक्तियों को समझ नहीं पाते, क्योंकि उन्होंने उनका केवल अच्छा व्यवहार ही देखा होता है। आत्ममुग्ध लोग अक्सर पूर्णता का मुखौटा पहनकर दूसरों का समर्थन अपने पक्ष में कर लेते हैं। इसलिए स्वयं से इतना प्रेम और सम्मान करें कि विषाक्त संबंधों से बाहर निकल सकें। उनसे दूर होने के बाद अपने जीवन को आगे बढ़ाने और स्वयं को ठीक करने पर ध्यान दें।
चिंता मत कीजिए — समय के साथ लोग भी उसी सच्चाई को समझ जाएंगे, जिसे आप आज देख पा रहे हैं।आप ही वह व्यक्ति हैं जो आत्ममुग्ध इंसान का असली चेहरा देख पाते हैं; जबकि दूसरों को वह दुनिया का सबसे अच्छा इंसान दिखाई देता है।
आत्ममुग्ध (Narcissistic) व्यक्ति की पहचान हमेशा आसान नहीं होती, क्योंकि ऐसे लोग शुरुआत में बहुत अच्छे और आकर्षक लगते हैं। लेकिन उनके व्यवहार में कुछ लगातार दिखने वाले संकेत होते हैं।
आत्ममुग्ध व्यक्ति की पहचान कैसे करें
(1) खुद को सबसे श्रेष्ठ समझना
हमेशा अपनी ही उपलब्धियों की बात करेगा
दूसरों की सफलता को छोटा दिखाएगा
आलोचना सहन नहीं कर पाता
“मेरे जैसा कोई नहीं” — यह सोच अक्सर दिखती है।
(2) सहानुभूति (Empathy) की कमी
आपकी भावनाओं को समझने या महत्व देने में रुचि नहीं,
आपकी पीड़ा को हल्का या गलत बता सकता है
(3) हमेशा प्रशंसा की अपेक्षा
लगातार तारीफ चाहता है,
ध्यान न मिलने पर नाराज़ या ठंडा व्यवहार
(4) गलती कभी स्वीकार नहीं करता
हर विवाद में दोष दूसरे पर डाल देगा
माफी मांगना बहुत कठिन लगता है
(5) लोगों को इस्तेमाल करना
संबंध तब तक निभाता है जब तक उसे फायदा हो,
जरूरत पूरी होते ही दूरी बना सकता है
(6) बाहर अच्छा, अंदर अलग व्यवहार
समाज में बहुत विनम्र और आदर्श दिखेगा,
निजी जीवन में कठोर या नियंत्रित करने वाला हो सकता है
(7) आपको ही गलत महसूस कराना (Gaslighting),आपकी बातों या यादों को गलत साबित क्रेग और तब धीरे-धीरे आपका आत्मविश्वास कम होने लगता है

महत्वपूर्ण बात
एक-दो आदतों से किसी को आत्ममुग्ध नहीं कहा जा सकता।
जब ये व्यवहार लगातार और लंबे समय तक दिखें, तब सावधानी जरूरी है।

— उमाकांत भारती

उमाकांत भारती

जन्म : 10 सितम्बर 1948 ई. कृतियाँ- ममता की मूर्ति, प्रतिशोध, कैसे कहूँ, बदलते रिश्ते, काला दिन, बुढ़ापे का गणित, नया बेटा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 100 से अधिक कहानियाँ प्रकाशित। लघुकथायें एवं कवितायें भी प्रकाशित। आकाशवाणी से कहानी, लघुकथा, आलेख प्रसारित। सम्पादन- पलाश अर्द्धवार्षिक का 2014 से सम्पादन सम्पर्क- मेहता निवास, नया टोला, भीखनपुर, गुमटी नं. 12 के पास, भागलपुर-812001 बिहार सचल दूरभाष- 9608228922 E-mail umakantsingh34535@gmail.com

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