आलपीन
सौरभ सबको जो रखे, जोड़े एक समान।
चुभे आलपीन-सा सदा, वो सच्चा इंसान।।
मीठे मुख के लोग तो, करते झूठा प्यार,
मतलब होते ही बदलें, अपने सब व्यवहार।
जो दुख में भी साथ दे, वही सही पहचान—
चुभे आलपीन-सा सदा, वो सच्चा इंसान।।
कड़वी बातें बोलकर, देता सही सुझाव,
भीतर जिसके प्रेम हो, वही भरेगा घाव।
सच की राहों पर चले, रखे सदा ईमान—
चुभे आलपीन-सा सदा, वो सच्चा इंसान।।
झूठे रिश्तों की यहाँ, लगती रोज़ नुमाइश,
चेहरों वाली भीड़ में, कहाँ रही आज़माइश।
जो दिल से दिल जोड़ दे, वही बने वरदान—
चुभे आलपीन-सा सदा, वो सच्चा इंसान।।
‘सौरभ’ कहे समाज में, दुर्लभ ऐसे लोग,
अपने दुख को पी गए, हरते जग के रोग।
मानवता की राह पर, जिनका ऊँचा मान—
चुभे आलपीन-सा सदा, वो सच्चा इंसान।।
— डॉ. प्रियंका सौरभ
