कविता

नौतपा : तप का ऋतु-विधान

जब सूर्य
रोहिणी नक्षत्र के प्रखर द्वार पर
अपने अग्नि-चरण रखता है,
धरती की देह पर
ताप का एक अदृश्य शास्त्र लिखना आरम्भ हो जाता है।

आकाश,
मानो अग्नि का दीर्घ उपवास धारण किए,
नीलेपन का समस्त सौम्य व्याकरण भूल जाता है।
हवाएँ थककर
अपने ही श्वासों के बोझ तले बैठ जाती हैं,
और वृक्ष—
छाँव होने के अपने धर्म में
मौन तपस्वी-से स्थिर दिखाई देते हैं।

नौतपा केवल मौसम नहीं,
यह प्रकृति की साधना का समय है;
जब धूप
धरती के धैर्य की परीक्षा लेती है,
और बीज
अँधेरे गर्भ में चुपचाप
अंकुरण की संभावनाएँ बुनते रहते हैं।

सूखी नदी का तल,
फटी हुई मिट्टी की रेखाएँ,
प्यासे पंछियों की काँपती चोंच—
सब मिलकर जैसे कहते हैं,
कि जीवन का सबसे कठिन अध्याय भी
अंततः सहनशीलता का ही व्याकरण रचता है।

ज्योतिष के प्राचीन आलोक में कहा गया—
जब सूर्य वृषभ राशि में
रोहिणी नक्षत्र के क्षेत्र में प्रवेश करता है,
तब यह नौ दिनों का ताप
धरती के संतुलन का एक अनिवार्य विधान बन जाता है।

मानो प्रकृति स्वयं
अग्नि से होकर
जल के उत्सव तक पहुँचने की साधना कर रही हो।
पर क्या केवल ऋतुएँ ही तपती हैं?

मनुष्य भी तो अपने भीतर
असंख्य नौतपा जीता है—
विरह का, संघर्ष का, प्रतीक्षा का,
अपूर्ण स्वप्नों और मौन पीड़ाओं का।

कितनी बार
जीवन की दुपहरियाँ इतनी झुलसा देती हैं
कि भीतर की नदी सूखने लगती है,
पर ठीक उसी समय
आत्मा के किसी गहन कोने में
आशा का एक बादल
धीरे-धीरे आकार लेने लगता है।

शायद इसीलिए
प्रकृति हर वर्ष नौतपा भेजती है—
यह स्मरण कराने कि
तपन दंड नहीं होती,
वह परिपक्वता का अनुष्ठान भी हो सकती है।

जो धूप में नहीं तपता,
वह वर्षा का वास्तविक अर्थ नहीं समझ पाता;
और जो पीड़ा में नहीं उतरता,
वह जीवन की हरियाली को
केवल दृश्य समझता है, अनुभव नहीं।

नौतपा यही कहता है—
हर दहकता हुआ समय
विनाश का संकेत नहीं होता;
कभी-कभी
झुलसती हुई धरती के भीतर ही
सावन अपना प्रथम स्वप्न बो रहा होता है।

— डॉ. अनिता जैन ‘विपुला’

डॉ. अनिता जैन

1. नाम: डॉ. अनिता जैन 2. धारक नाम / उपनाम (लेखन हेतु): "विपुला" 3. जन्मदिन एवं जन्म 11 जुलाई स्थान: बीकानेर राजस्थान 4. शैक्षणिक योग्यता (ऐच्छिक): Ph. D. , M. Phil. NET. M.A. (संस्कृत - साहित्य , दर्शन ) M.A. ( हिंदी साहित्य ) MBA in HR 5. व्यवसाय: अतिथि प्राध्यापक ( विश्वविद्यालय में ) 6. प्रमुख लेखन विधा: छंद मुक्त, मुक्तक, हायकू ,वर्णपिरामिड, क्षणिका, लघुकथा,निबन्ध, आलेख आदि। 7. साहित्यिक उपलब्धियाँ/पुरस्कार/सम्मान: विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविताएँ एवं लेख प्रकाशित होते रहते हैं। आकाशवाणी में एंकरिंग एवं कविता पाठ आदि । ngo से जुड़ी हुई हूँ। समय समय पर सामाजिक उत्थान के कार्यों में सहभागिता। हिंदी के साथ साथ राजस्थानी भाषा में भी लेखन। "वर्णपिरामिड श्री", "सर्वश्रेष्ठ मुक्तककार", सम्मान आदि । 8. रुचि/शौक़: संगीत, अध्ययन,लेखन,प्राकृतिक स्थलों का भ्रमण,कुकिंग आदि । 9. वर्तमान पता एवं सम्पर्क सूत्र (ऐच्छिक): सेक्टर - 4, उदयपुर राजस्थान । Email- dranitajain@gmail.com 10. उपलब्धियों में- 12 वीं बोर्ड की योग्यता सूची में 7वाँ स्थान। मेडल एवं मैरिट छत्रवृति प्राप्त, बी. ए. में राष्ट्रीय छत्रवृत्ति प्राप्त। NSS में प्री आर डी एवं राष्ट्रीय एकात्मकता शिविर में राजस्थान का प्रतिनिधित्व।वाद विवाद , आशु भाषण, निबन्ध एवं कविता आदि में छात्र जीवन में अनेक पुरस्कार प्राप्त। *महाविद्यालय शिक्षिका के रूप में केरियर की शुरुआत। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में पत्र वाचन, शोध पत्र प्रकाशन। *दो पुस्तकें शीघ्र प्रकाशित होने वाली हैं।

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