नौतपा : तप का ऋतु-विधान
जब सूर्यरोहिणी नक्षत्र के प्रखर द्वार परअपने अग्नि-चरण रखता है,धरती की देह परताप का एक अदृश्य शास्त्र लिखना आरम्भ हो
Read Moreजब सूर्यरोहिणी नक्षत्र के प्रखर द्वार परअपने अग्नि-चरण रखता है,धरती की देह परताप का एक अदृश्य शास्त्र लिखना आरम्भ हो
Read Moreदेखा जो तुमने हुआ यह असर रंग ही रंग फ़िजा में गये बिखर। कुछ गुलाबी नीले लाल पीले चाहत के
Read Moreशिक्षा वही जो राष्ट्र पर गौरव करना सिखाए। अपनी जननी जन्मभूमि पर मर मिटना सिखाए। फलों से लकदक पेड़ों की
Read Moreरहा अम्बर धरा का अनुपम मिलन है चुप रहो, सांझ सिन्दूरी का स्नेह अभिनन्दन है चुप रहो।। आलिंगन के साज
Read Moreहो रहा अम्बर धरा का अनुपम मिलन है चुप रहो, सांझ सिन्दूरी का स्नेह अभिनन्दन है चुप रहो।। आलिंगन के
Read Moreहर बार इत्तफाक़ों का सैलाब मेहरबान नहीं होता। काम ना आ सके जो दूसरों के वह इंसान नहीं होता। ज़िन्दगी
Read Moreहै वक्त की खूबी, कैसा भी हो गुज़र जाता है। रखता कदम जो संभालकर, वह संवर जाता है। आती रहें
Read Moreचिड़िया और पेड़ की दोस्ती थी। “चिड़िया, चिड़िया .. बड़ी चहक रही हो ? कहाँ उड़ती रहती हो आजकल !”
Read More