Author: डॉ. अनिता जैन

कविता

रसामृत कृष्ण (रूपगोस्वामी के भक्ति-दर्शन से प्रेरित)

तम की तंद्रा टूटी, नील निशा मुस्काई,बंदीगृह के घोर तम में कृष्ण-ज्योति आई।जैसे सूनी धरती पर सावन-ऋतु छाई,वैसे मानव-मन में

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