विफल करें हर चाल
झूठी-साज़िश गढ़ रहे, , फैलाएँ भ्रम-जाल।
सजग रहे जन-गण सभी, विफल करें हर चाल॥
सदा देश की एकता, इनको अखरे पार्थ।
भेदभाव की आग से, सेके अपना स्वार्थ॥
राष्ट्रहितों को छोड़कर, करते केवल शोर।
जनता समझे भेद सब, अब न चलेगा जोर॥
बात-बात पर खोजते, नित नया विवाद।
मिल-जुलकर रहना मगर, देश रहे आबाद॥
स्वार्थ-सिद्धि की चाह में, बाँटें जाति-समाज।
प्रेम-सद्भावों से बने, भारत का सिरताज॥
अफवाहों के पंख पर, उड़ते इनके बोल।
सत्य-सूर्य के सामने, खुलते सारे खोल॥
नफ़रत के व्यापार से, मिलता कब सम्मान।
प्रेम-एकता से बढ़े, भारत की पहचान॥
जन-मन को बरगला सकें, इतना नहीं आसान।
सत्य खड़ा है साथ में, लेकर दृढ़ अभियान॥
‘सौरभ’ मिलकर देश का, रखें सभी हम मान।
एकजुट होकर बढ़े, अपना हिन्दुस्तान॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ
