चाय
यह चाय जिंदगी की सुबह है
सुबह सुबह न मिले
तो लगता है दिन हुआ नहीं
मेरा दिन इस चाय से है
रात मेरी इसके स्वाद से है
न मिले तो लगता है शरीर बेजान है
इसकी हर चुस्की में एक नशा है
कप का ओठों पे लगना
इक एहसास देता है
प्रेयसी के अधरों का अधरों से मिलन
यह चाय जिंदगी की सुबह है
सुबह सुबह न मिले
तो लगता है दिन हुआ नहीं
मेरा दिन इस चाय से है
रात मेरी इसके स्वाद से है
न मिले तो लगता है शरीर बेजान है
इसकी हर चुस्की में एक नशा है
कप का ओठों पे लगना
इक एहसास देता है
प्रेयसी के अधरों का अधरों से मिलन