व्यंग्य – कब आएगी लाड़ला भांजा योजना?
मामाजी केंद्र में किसानी मंत्री बन गए, इधर राज्य के चुनाव हुए और मोहन काका साब सीएम बने।मामा, पहले आपने लाड़ली बहना योजना लांच कर दी है और खूब अंडशंड वाही-वाही लूट ली, लेकिन आप लाड़ला भेरु या खासमखास मंदरूप भांजा योजना भी लाओ ना हमने आपके कुनबे का क्या बिगाड़ा है?आये दिन ये अमका योजना वो फलानी योजना ये ठिमकी स्कीम। बहनों को इतने मिलेंगे,बेटियों को उतने मिलेंगे,बाई होण के इत्ता मिलेगा लेकिन मिलेंगे सिर्फ महिलाओं को ही,बाई-भेनो को ही मुआ मरद होन को मिलेगा ठेंगा ?फावड़ी को नाम गेल सप्पा..?क्यों मामा,या अब मोहन काका साब हम मर्दों से, भतीजों से कई अन्ट्स है। काका, भाई, फूफा, साढू, ससुरों से कई नाराजी है ? ऐसा कई करो मामा जी मालक?मोहन काका जी?पापा की परियों” को दे दो सब,पापा के पोरया वास्ते रींगणा?मीठो-मीठो नानी,पोरी वास्ते और छोरा होन सारू खट्टोंभुस भी नी?ये तो नाइंसाफी है।घोर पक्षपात?गहरी जलन है?हम भी घरों में ही पैदा हुए थे।कोई नर्मदा माई की पूर से नी आया था हमको कोई भेगत, राक्षस रखने नहीं आया था?मामाजी,काका साब बस बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ में ही आपका ध्यान है तो फोकट फटीके के भाँजो में क्यो नही?हम बापडों ने कौन की बांडी भैस हड़प ली है?या काली गाय मार लाखी है?तो बेटों का,भाँजो का,साढू का,सालों का,फूफा,भाई होण का दुख कौन समझेगा ?हमारो दरद कौन काटेगो?हमने तो बचपन में घर से स्कूल तक खूब जूते खाये।अरे हम तो बिना गलती के भी दादा के ,बाप के,मोटा भाई के बड़ी भेनो के जूते खाते रहते थे,आये हैं ।अब भी सरकार लपक के कनपटी में हेंच के धर रही है और कोई देखने-सुनने वाला नी है।काका, फूफा, ताऊ,भय्या,मौसा, पड़ोसियों तक को छूट थी कि ज़रा सी भी गलती देखते ही हमको ही कूटा करें ।दे कनपटे में सनन सट,भनन भटट?कोई मुलाहजा नही?स्कूल के माट साब भी तो बिना देखे हमारे कान सूजा देते थे।मूल के साथ ब्याज में दो रेपट और धरते थे।यातायात पुलिस भी उन बेटियों पर ही मेहरबान रहती है,सिर्फ हमारे,छोरे होण का ही चालान बनाती है।हमे देख कर ही सिटी बजाती है,फुर्ररर..?लड़कियों को बिना रोके जाने देती है क्योंकि वे उनकी लाड़ली भेन-बेटी जो लगती हैं।दुर्गा मईया सी,पापा की परियाँ बिना इंडिकेटर गाड़ी मोड़ लेती हैं , उनकी गलती पर हम ठुक जायें तो आसपास के चार समाज सेवी हमारी कनपटी सुजा जाते हैं।बोची के बाल उड़ा देते है।ऊपर से अब आपकी नई नई योजनायें लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहन योजना, स्कूटी , लेपटॉप, मोबाइल मुफ्त ।तो हम कहाँ जाएँ? किधर भटकें?हमारे भी मामा जी,काका साब हो आप या सिर्फ महिलाओं के,भेनों के,बड़ सासों के ही हो ?हमने भी पेले वोट दिया आपको हम क्या सौतेले भांजे हैं?सगी क्या सिर्फ भांजी ही हैं आपकी? हम प्रदेश के दिलदार मुख्यमंत्री से मांग करते हैं कि जल्द ही “लाड़ला भेरू”,प्यारा मंदरूप,लवली लखन,प्रिय प्रशांत योजना शुरु करो ।हमको भी पापा की परियों जैसा महत्व दिया जाये, हमको भी फ्री मे लेपटॉप, बाईक, मोबाईल, टेबलेट (मेडिकल वाली नही) दो । अरे कम से कम हजार रुपये महीने वाली “लाड़ला भेरू” योजना लागु ही कर दो तो हम भी गब्बर हो के गुटका खा के घूमें । बचपन से कुटाते आ रहे हैं। अब आप तो बख्शो ऐसा मत करो मामा, मोहन काका साबऍ
निवेदक- आपके मालवी भांजे, खरे भतीजे, चालू चेले-चपाटी, हिरदे प्रांत, मध्यप्रदेश के बाशिंदे।
— दिनेश गंगराड़े
