पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास
धैर्य धरो विपदा घड़ी, रखो हृदय में आस।
पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥
घोर अँधेरा देखकर, होना नहीं उदास।
रजनी के आँचल तले, छिपा हुआ प्रकाश॥
संकट चाहे लाख हों, डिगे न मन-विश्वास।
पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥
काँटों से भर जाए यदि, जीवन की हर राह।
चलते रहने से मिले, मंज़िल की परछाह॥
मेहनत के हर बीज का, मिलता मधुर विकास।
पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥
मन के सारे संशयों, को मत देना थाम।
आशा की सरिता बहे, लेकर शुभ परिणाम॥
धीरज जिसका मित्र है, उसके पास उजास।
पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥
सुख-दुख दोनों धूप-छाँ, जीवन का व्यवहार।
जो समभावी बन गया, उतरा भव से पार॥
हँसकर जो स्वीकार ले, हर ऋतु का आभास।
पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥
धैर्य, भरोसा, कर्म से, खिलता जीवन-फूल।
विपदा भी वरदान है, यह मत जाना भूल॥
आशा का दीपक जले, मन में रहे सुवास।
पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥
— डॉ. प्रियंका सौरभ
