कविता

उनका हिस्सा

चमचमाती गाड़ियां
चमचमाते लोग
उनके बड़े-बड़े महल
उनके वे रसूख
एक भीड
जो उनके साथ खड़ी है
उनके पास
जो धनबल,बाहुबल है
सड़क पर
रात जो गुजार रहे हैं
उन रसूखदारों से
कोई मतलब नहीं है
बस उनकी
एक पीड़ा है
उनके हिस्से पर
रसूखदारों का मजमा लगा है

— जयचन्द प्रजापति ‘जय’

*जयचन्द प्रजापति

प्रयागराज मो.7880438226 jaychand4455@gmail.com

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