क्षणिका इंसान *ब्रजेश गुप्ता 03/07/202604/07/2026 0 Comments न देव बनना मुझे न ही दैत्य मुझे बस प्रेम कर प्रेम को आत्मसात करना है प्रेम में एकाकार हो इंसान बनना है