कविता

बेटियाँ

घर-आँगन परिवार की,

रौनक होती है बेटियाँ।।

फुहारों-सी मनभावन सरगम,

चहकती पायल की छमछम,

मचलती कंगना की खनखन,

मातु पिता के दिल की धड़कन।।

बगियाँ की मनचली तितलियाँ,

रौनक होती है बेटियाँ ।।

बिटिया बिना घर सूना-सूना,

बिटिया बिना हर त्यौहार सूना,

उमंगों भरी छलकती गागरी,

आह्लादित करती मन को बावरी।।

खिलती सुहासिनी कलियाँ,

रौनक होती है बेटियाँ।।

मुस्कुराती जैसे फूल खिल रहे हो,

निर्मल झरना झरझर झर रहा हो,

पापा की दुलारी,माता की परछाई, 

बलखाती शोभिता रमणी-सी।।

मोहिनी ये फुलझड़ियाँ,

रौनक होती है बेटियाँ।।

पीहर की गली खूब लगे प्यारी,

शूल हो या धूल सबसे है यारी।

नेह की रसभरी, प्रेम की चाँदनी,

ये खिली-खिली फुलवारी-सी बेटियाँ।।

है ह्रदय की झंकार बेटियाँ,

रौनक होती है बेटियाँ।।

*चंचल जैन

मुलुंड,मुंबई ४०००७८

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