युग पुरुष स्वामी विवेकानंद जी और वर्तमान की चेतना
स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व केवल एक संत का नहीं बल्कि एक ऐसे युगदृष्टा का था जिन्होंने सदियों आगे की चुनौतियों को भांप लिया था आज के दौर में जब हम तकनीकी चकाचौंध और भौतिक दौड़धूप में अपना मानसिक संतुलन खो रहे हैं तब स्वामी जी की वाणी किसी मरहम की तरह है
उनकी शिक्षाओं में जो सबसे बड़ा मंत्र है वह है आत्मशक्ति का जागरण वे कहते थे कि मनुष्य को अपने भीतर छिपे असीम सामर्थ्य को पहचानना चाहिए आज का युवा जब अवसाद और असफलता के डर से घिरा होता है तब विवेकानंद का यह उद्घोष की उठो जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक मत रुको सबसे बड़ी संजीवनी बन जाता है यह वाक्य केवल किताबी उपदेश नहीं बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है जो हमें हार न मानने का साहस प्रदान करती है
स्वामी जी ने धर्म और विज्ञान के समन्वय पर जो जोर दिया था वह आज के वैज्ञानिक युग के लिए एक दिशा निर्देश है उन्होंने कभी भी अंधविश्वास का समर्थन नहीं किया बल्कि विवेक और तर्क के आधार पर सत्य को परखने की बात कही उनका मानना था कि सेवा ही नारायण की सच्ची उपासना है दरिद्र नारायण की सेवा को ही उन्होंने धर्म का आधार बताया आज के समाज में जहां मानवता पर स्वार्थ हावी हो रहा है वहां उनका यह संदेश कि समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा ही राष्ट्र निर्माण है अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है
शिक्षा के संदर्भ में उनका विचार था कि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं बल्कि मनुष्य के निर्माण का साधन है आज की शिक्षा प्रणाली में कौशल के साथ साथ चरित्र निर्माण का अभाव दिख रहा है यदि विवेकानंद के विचारों को हम अपनी शिक्षण पद्धति में उतारें तो हम ऐसे नागरिकों को गढ़ सकेंगे जो न केवल बुद्धिमान होंगे बल्कि संवेदनशील भी होंगे
आज की दुनिया में जब वैचारिक मतभेद बढ़ रहे हैं और शांति के लिए जद्दोजहद जारी है तब उनके सर्वधर्म समभाव और विश्व बंधुत्व के विचार ही हमें एक सूत्र में पिरो सकते हैं स्वामी विवेकानंद की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है बल्कि बढ़ गई है क्योंकि वे हमें सिखाते हैं कि कैसे आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहकर विश्व का नेतृत्व किया जा सकता है
स्वामी जी के विचार आज भी हमारे लिए एक ध्रुवतारे के समान हैं जो हमें भटकाव से बचाकर सही दिशा की ओर प्रेरित करते हैं यदि हम उनके बताए मार्ग का रत्ती भर भी अनुसरण करें तो न केवल व्यक्तिगत बल्कि राष्ट्र के स्तर पर भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है उनका चिंतन कालजयी है जो हर दौर में मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा
स्वामी विवेकानंद की शिक्षाएं आज के समय में कितनी आवश्यक हैं और आप उनके किस विचार से सबसे अधिक प्रभावित हैं,ये प्रश्न आपके लिए है। क्या आप स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को आत्मसात करते हैं?
— डॉ. मुश्ताक़ अहमद शाह सहज़
