मुक्तक/दोहा

देत जीत को मात

कर्महीन के पास हैं, चिंता और अवसाद।
कर्मयोग के साथ हैं, फर्स अर्श की खाद।।

कर्ता को ना चाह है, आए कोई साथ।
कर्म सदा ही साथ है, ले हाथों में हाथ।।

समय प्रतीक्षा ना करे, चलता है दिन-रात।
व्यक्ति प्रतीक्षा करत जो, देत जीत को मात।।

जीवन का इक राज है, चलने में है जीत।
रुकने में ना काज है, नहीं बचत है प्रीत।।

प्रेम जहाँ, है चाह ना, ना बंधन, ना रीत।
जहाँ मौन में गान है, हार यहाँ है जीत।।

प्रेम प्रेम जग गा रहा, पाया कोई जान?
खुद में खुद को खोजता, प्रेमी वही महान।।

डॉ. संतोष गौड़ राष्ट्रप्रेमी

जवाहर नवोदय विद्यालय, मुरादाबाद , में प्राचार्य के रूप में कार्यरत। दस पुस्तकें प्रकाशित। rashtrapremi.com, www.rashtrapremi.in मेरी ई-बुक चिंता छोड़ो-सुख से नाता जोड़ो शिक्षक बनें-जग गढ़ें(करियर केन्द्रित मार्गदर्शिका) आधुनिक संदर्भ में(निबन्ध संग्रह) पापा, मैं तुम्हारे पास आऊंगा प्रेरणा से पराजिता तक(कहानी संग्रह) सफ़लता का राज़ समय की एजेंसी दोहा सहस्रावली(1111 दोहे) बता देंगे जमाने को(काव्य संग्रह) मौत से जिजीविषा तक(काव्य संग्रह) समर्पण(काव्य संग्रह)

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