शेर और खरगोश
बड़ी जोर से शेर दहाड़ा— “जंगल में मेरा है राज!”
खरगोश बोला, “मिलकर रहना, आवश्यक है आज ।”
हो बलवान और बुद्धिमान भी, किन्तु न करिए क्रोध,
छोटे जीव भी बड़े काम के, रहें शांत महाराज।“
शेर ने सोचा— “बल से बढ़कर, बुद्धि का है सम्मान।
छोटे से भी सीख मिले तो, क्यों करना अभिमान?”
वन में पेड़, लता, पशु-पक्षी, सभी प्रकृति के अंग,
मिल-जुलकर रहना ही सुंदर, जीवन का है विधान।
बड़े कभी भी छोटों को, अपने बल से न डराएँ।
छोटे भी निज सूझ-बूझ से, मित्रों को राह दिखाएँ।
दया, मित्रता, प्रेम से जग में, खुशियाँ आतीं ढेर,
आओ! हम सब मिलजुल सबको, शुभ संदेश सुनाएँ।
— गौरीशंकर वैश्य विनम्र
