भूकंपीय गतिविधियों को नजरअंदाज न करें
लद्दाख में आज यानी गुरुवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.5 मापी गई।भूकंप के झटके से लोग सहम उठे। कुछ दिन पूर्व वेनेजुलाके बाद अब कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकम्प से काफी जान माल की हानि हुई।अक्सर यह देखा गया कि जब भी सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण लगने वाला हो उसी दौरान भूकम्पीय घटना घटित होती रही है।वर्तमान में सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण लगने वाले है।समुद्र में ज्वार भाटा चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के कारण होता है।ये पूर्णिमा पर जब पूर्ण रूप से चंद्रमा का आकार दिखाई देता तब।
इसके अलावा चन्द्रग्रहण ,सूर्यग्रहण के दिनों के आसपास भी होती है।धरती की प्लेटो के टकराने से,कही कही जमीन से गैस निकलने की घटना भी भूकंप के आने का संकेत देती है।देखा जाए तो पृथ्वी पर भूकंप की खबरे आए दिन पढ़ने को आती रहती है. भूकंप को आने से रोका तो नहीं जा सकता किंतु एहतियात बरते जाने से जान माल की हानि को कम अवश्य किया जा सकता है. भूकंप अवरोधी मकानों की संरचना कर और सायरन बजाकर सतर्क रहने का उपाय किया जा सकता है. भूकम्प आने का एक लक्षण को देखते हुए भूगर्भीय शास्त्रियों से सलाह अवश्य लेना चाहिए. भविष्य में भूकंप के खतरे को देखते हुए अभी से प्रयास प्रारंभ कर देना चाहिये. इन प्रयासों से भूकंप को रोका तो नहीं जा सकता किन्तु उसकी विनाशकता को तो कम किया जाकर जान- माल की हानि मे कमी की जा सकती है. इसके लिए भूकंपीय क्षेत्रों में भूकंप अवरोधी संरचनाओ तथा अन्य कोशिशो पर ध्यान देकर भूकंप के झटके सहन करने वाला क्षेत्र बनाया जाए.
— संजय वर्मा ‘दृष्टि’
